जम्मू-कश्मीर पुलिस के अडिशनल डायरेक्टर जनरल (लॉ एंड ऑर्डर) मुनीर अहमद खान पर जमीन हथियाने के आरोप लगे हैं. उन्हें एक हफ्ते पहले ही एक साल का एक्सटेंशन दिया गया था. जिस प्रॉपर्टी को हथियाने के आरोप लगे हैं, उसे हाल ही में खान और उनकी पत्नी गुलशरीन ने गुपकार रोड पर खरीदा है. गुपकार रोड के बंगले स्टेटस सिंबल माने जाते हैं. इस इलाके में काफी सिक्योरिटी रहती है और यहां अमीर और ताकतवर हस्तियों के अलावा वीवीआईपी ही रहते हैं.
जिस संपत्ति को लेकर आरोप लगे हैं, उसमें मुनीर खान रिटायरमेंट के बाद रहने वाले हैं. मुनीर खान ने इंडिया टुडे को बताया कि यह जमीन करोड़ों रुपये की है और वह अब तक 97 लाख रुपये इस 'प्राइवेट प्रॉपर्टी' के लिए दे चुके हैं. लेकिन मुनीर के गुपकार रोड के एक पड़ोसी ने आरोप लगाया कि यह जमीन एक संरक्षक भूमि है.
संयोग से मुनीर खान के भाई बशीर अहमद खान राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारी हैं और उन पर गुलमर्ग में कई प्रभावशाली लोगों को गैरकानूनी तरीके से जमीन देने का आरोप है. लेकिन इन विवादों के बावजूद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दोनों भाइयों को एक-एक साल का एक्सटेंशन दे दिया.
मुनीर खान ने इंडिया टुडे से कहा, 'यह डील पूरी तरह से वैध है. खान ने कहा कि उन्होंने यहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जम्मू में अपनी पुश्तैनी जमीन को बेचा. खान ने कहा कि उन्होंने यह संपत्ति खरीदने से पहले काफी जांच-पड़ताल की और जब पाया कि इस पर कोई विवाद नहीं है, तब यह संपत्ति खरीदी.' उन्होंने आगे कहा, 'हमने एक स्पेशल कमिटी के जरिए टाइटल और सीमांकन के लिए अप्लाई किया और इस रिपोर्ट पर कस्टोडियन ने हामी भरी और दस्तखत भी किए.'
खान ने कहा, 'आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के कारण मेरी और मेरे परिवार की जिंदगी खतरे में है. इसलिए मैंने श्रीनगर के सबसे सुरक्षित इलाके में रहने की प्लानिंग की है.' उनके करीबी सूत्रों ने कहा, एक्सटेंशन मिलने के बाद यह उनकी छवि को खराब करने की साजिश है. वहीं उनके होने वाले पड़ोसी मीर ने राममुंशी बाग पुलिस को खत भेजकर 'गैरकानूनी निर्माण' रोकने को कहा है. मीर का दावा है कि यह कस्टोडियन प्रॉपर्टी है. जम्मू-कश्मीर सरकार के मुताबिक कस्टोडियन लैंड खरीदी या बेची नहीं जा सकती.
मीर के करीबी सूत्रों ने बताया, उनका मानना है कि मामले में 'जोड़-तोड़' करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसमें कस्टोडियन संपत्ति को प्राइवेट प्रॉपर्टी में तब्दील किया गया, ताकि मुनीर खान यह सौदा कर सकें. चूंकि पुलिस महकमा खान के अंडर है इसलिए वह जानते हैं कि वह बेहद शक्तिशाली लॉबी से टक्कर ले रहे हैं. मीर ने इंडिया टुडे से कहा कि वह उस जमीन के टुकड़े का नक्शा देखना चाहते हैं, ताकि यह पता चल जाए कि जमीन कस्टोडियन है या प्राइवेट.
डील को कानूनी दिखाने के लिए मुनीर खान ने पुलिस स्टेशन में दस्तावेज पेश किए हैं. अब मीर पुलिस स्टेशन और राजस्व विभाग को भी खत भेजने की योजना बना रहे हैं. मुनीर खान 1984 बैच के कश्मीर पुलिस सर्विस के अफसर हैं. उन्हें साल 1994 में आईपीएस में लाया गया था. कश्मीर में आतंकियों का खात्मा करने के लिए ऑपरेशन ऑल आउट की कमान उन्होंने ही संभाली थी.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में यह सामने आया
इंडिया टुडे को मिले दस्तावेजों के मुताबिक इस साल विवाद होने के बाद 22 अप्रैल को जॉइंट सर्वे कमिटी का गठन किया गया था. इस कमिटी में राजस्व विभाग, कस्टोडियन प्रॉपर्टी कश्मीर, डिफेंस एस्टेट और कैंट बोर्ड बादामी बाग के प्रतिनिधि शामिल थे. कमिटी ने कहा कि यह विवाद अफांडी की प्रॉपर्टी को लेकर है, जिसे अध्यादेश लाकर सरकार दुश्मनों का एजेंट घोषित कर चुकी है. राजस्व विभाग के सहायक आयुक्त के खतों से पता चलता है कि कस्टोडियन ने प्राइवेट प्रॉपर्टीज के साथ जमीन एक्सचेंज करा ली थी.
अन्य आरोप हैं कि सारे पेपर्स एक ही दिन में प्रोसेस कर दिए गए और बैनामे पर कैंट बोर्ड की आपत्ति के बावजूद पजेशन दे दी गई. लेकिन कैंट बोर्ड की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया क्योंकि रक्षा अधिकारियों की राय अलग दी. यह जमीन न तो 1946 से पहले और न ही बाद में सैन्यबलों के कब्जे में थी. रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि यह जमीन गुलशरीन (खान की पत्नी) के नाम पर है. लिहाजा इसे चुनौती देने का कोई आधार नहीं बनता.