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जिस आतंकी को वाजपेयी सरकार ने किया था रिहा, उसी ने दिया अनंतनाग हमले को अंजाम

बुधवार को अनंतनाग में आतंकियों के आत्मघाती हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल  के 5 जवान शहीद हो गए. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुश्ताक अहमद जरगर इस हमले का मास्टरमाइंड है.

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सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)

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पाकिस्तान का खूंखार आतंकी  मुश्ताक अहमद जरगर अब जम्मू - कश्मीर में एक बार फिर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. मूल रूप से कश्मीर का रहने वाला मुश्ताक अहमद जरगर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अल-उमर-मुजाहिदीन के बीच संयोजक का काम करेगा. जरगर को कश्मीर में आतंक फैलाने की जिम्मेदारी दी गई है.

कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों के एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के कई आतंकी ढेर हो चुके हैं. कश्मीर में अपनी जड़ें खो रहा यह आतंकी संगठन अब एक नए टेरर फ्रंट के साथ सामने आ रहा है. इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 हाइजैक के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जिस आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया गया था, उसका हाथ अनंतनाग हमले में भी था. बुधवार को अनंतनाग में आतंकियों के आत्मघाती हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 5 जवान शहीद हो गए.  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस आतंकी का हाथ इसमें शामिल था.

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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में आतंकियों ने 24 दिसंबर, 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 को हाईजैक कर लिया था. इसमें 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर्स सवार थे. आतंकियों ने शुरू में भारतीय जेलों में बंद 35 उग्रवादियों की रिहाई और 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग की. सरकार इस पर राजी नहीं हुई और बाद में तीन आतंकियों को छोड़ने पर सहमति बनी. वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह खुद ही आतंकी मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद को लेकर गए और रिहा किया. इसके बाद प्लेन को छोड़ा गया.

अनंतनाग में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स  (सीआरपीएफ) काफिले पर हुए हमले में 5 जवान शहीद हुए थे, वहीं तीन अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. जरगर को इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. भारत की सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि हमले के पीछे अल-उमर-मुजाहिदीन का हाथ है.

यह जैश-ए-मोहम्मद और अल उमर दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की मिली जुली साजिश है. सूत्रों का कहना है कि अल-उमर-मुजाहिदीन अकेले इतना सक्षम नहीं है कि अनंतनाग जैसे आतंकी घटनाओं को अंजाम दे सके. अहमद जरगर जैश और अल उमर के साथ मिलकर कश्मीर में दहशत फैला रहा है.

कश्मीर में आतंकी जरगर एक बार फिर अपने पांव पसार रहा है. 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे. इस हमले के बाद सुरक्षाबलों के निशाने पर जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी रहे. सुरक्षाबलों के साथ हुए मुठभेड़ में बड़ी संख्या में आतंकियों का खात्मा किया गया.  

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अल-उमर-मुजाहिदीन का मुखिया मुश्ताक अहमद जरगर एक लंबे समय के बाद कश्मीर में सक्रिय हुआ है.  जरगर जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट का आतंकी रहा है और लंबे वक्त से पाकिस्तान में सक्रिय है.

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