भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में छोटी-छोटी नदियों की हिफाजत करना सीमा सुरक्षा बल की बड़ी परेशानियों में से एक है. आतंकी कई बार इस ओर चूक का फायदा भी उठा चुके हैं. लेकिन बीएसएफ ने अब उन दरारों को पाटने के लिए एक तकनीकी समाधाना विकसित कर लिया है. बीएसएफ अब लेजर की दीवारों के जरिए नदियों की चौकसी कर रही है.
बताया जाता है कि नियंत्रण रेखा छोड़कर करीब 3,323 किलोमीटर लंबी सीमा की हिफाजत करने में ‘फरहीन’ नाम की लेजर की दीवार बीएसएफ के बहुत काम आ रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि जम्मू क्षेत्र में बसंतार, बेन नाला, करोल कृष्ण और पलोआ नाला नाम की नदियों के क्षेत्र में लेजर दीवार लगाई गई है.
गौरतलब है कि 26 सितंबर 2013 को दोनों देशों की सीमा के बीच स्थित एक छोटी सी नदी के एक हिस्से के जरिए कई हथियारबंद आतंकवादी जम्मू के हीरा नगर इलाके में घुस आए थे. इस घुसपैठ में एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. यही नहीं, मार्च महीने में जम्मू के कठुआ जिले में थलसेना की वर्दी पहने तीन आतंकवादियों ने एक जवान और दो आम लोगों की हत्या कर दी. माना जाता है कि उन आतंकवादियों ने भी भारतीय सीमा में दाखिल होने के लिए नदी का ही सहारा लिया था.
नई तकनीक के तहत बीएसएफ लेजर-निर्देशित और तापमान को लेकर संवेदनशील ऐसे रेडारों का भी परीक्षण कर रही है, जो रोशनी के रास्ते से किसी के गुजरते ही अलार्म बजा देते हैं. इजरायल और सिंगापुर जैसे देशों में भी सीमा की हिफाजत के लिए ऐसी तकनीक इस्तेमाल में लाई जाती है.
-इनपुट भाषा से