Jammu-Kashmir Delimitation: जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की सिफारिशों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. परिसीमन आयोग ने राज्य में 7 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इसमें से 6 सीटें जम्मू और 1 सीट कश्मीर बढ़ाने की सिफारिश की है. लेकिन जम्मू में ज्यादा सीटें बढ़ाने का विरोध शुरू हो गया है. पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर की स्थानीय पार्टियों ने आरोप लगाया है कि जम्मू में सीटें बीजेपी के राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए बढ़ाई गई हैं.
क्या है परिसीमन आयोग की सिफारिश?
- विधानसभा सीटों के पुनर्गठन के लिए गठित परिसीमन आयोग ने जम्मू में 6 और कश्मीर में 1 सीट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही 9 सीटें अनुसूचित जनजाति और 7 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखने की सिफारिश की है. वहीं, 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के लिए रखी गई हैं.
- जम्मू-कश्मीर में पहले 87 विधानसभा सीटें होती थीं, जिनमें से 4 लद्दाख में थीं. क्योंकि लद्दाख अब बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है, इसलिए वहां कोई सीट नहीं होगी. इस तरह से जम्मू कश्मीर में अब 87 की बजाय 83 सीटें ही होंगी. अगर परिसीमन आयोग की सिफारिशों को मान लिया जाता है तो यहां 90 सीटें हो जाएंगी. इनमें से 43 सीटें जम्मू में और 47 सीटें कश्मीर में होंगी.
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विवाद किस बात को लेकर है?
- विवाद जम्मू क्षेत्र में ज्यादा सीट बढ़ाने को लेकर है. ये परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर हुआ है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू की आबादी 53.72 लाख और कश्मीर की आबादी 68.83 लाख है. विरोध करने वालों का तर्क है कि आबादी कश्मीर में ज्यादा है तो फिर जम्मू में ज्यादा सीटें क्यों बढ़ाई जा रहीं हैं?
- इस विवाद का दूसरा कारण राजनैतिक है. नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अपनी पार्टी समेत कई पार्टियों ने इन सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि परिसीमन आयोग ने बीजेपी के एजेंडे पर काम किया है. महबूबा मुफ्ती का तो यहां तक कहना है कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए ही आयोग का गठन किया गया था.
- सीटें जम्मू में बढ़ाई गई हैं, जहां 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 25 सीटें (37 में से) जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कश्मीर मुस्लिम बहुल है और जम्मू हिंदू बहुल है. इसलिए बीजेपी को जम्मू में फायदा मिलने की उम्मीद है. वहीं, घाटी में पीडीपी और एनसी की अच्छी पकड़ है.
- अब तक के चुनावों में देखा गया है कि घाटी में बेहतर प्रदर्शन करके भी सरकार बन जाती थी, लेकिन सीटें बढ़ने के बाद जम्मू में भी ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना जरूरी हो जाएगा. इस वजह से वहां राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. इसलिए विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रहीं हैं कि जम्मू में सीटें बढ़ाकर बीजेपी सत्ता की कुर्सी तक पहुंचना चाहती है.
जम्मू-कश्मीर में क्यों हो रहा है परिसीमन?
दरअसल, 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को खास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया था. साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था. क्योंकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी है, इसलिए यहां चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था.
इस आयोग को इसी साल 5 मार्च तक अपनी रिपोर्ट देनी थी. लेकिन कोरोना महामारी के चलते ऐसा नहीं हो पाया. जिसके बाद आयोग का कार्यकाल एक साल के बढ़ा दिया गया था. इस आयोग को 6 मार्च 2022 तक रिपोर्ट देनी है. ये परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर हो रहा है. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1995 में परिसीमन हुआ था.