जम्मू-कश्मीर में बुधवार को विधानसभा भंग होने के बाद राज्य की राजनीति में अनोखा नजारा देखने को मिला. राज्य में एक-दूसरे के विरोधी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की मुखिया महबूबा मुफ्ती ट्विटर पर एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते नजर आए.
विधानसभा भंग होने के बाद राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने एक के बाद एक चार ट्वीट किए. उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक के विधानसभा भंग करने को जल्दबाजी भरा फैसला बताया.
इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'एक राजनेता के तौर पर मुझे लगता था कि मैंने अपने 26 साल के करियर में सब कुछ देख लिया है. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि कभी भी 'नेवर' नहीं कहना चाहिए. इसके बावजूद मैं दिल से उमर अब्दुल्ला और अंबिका सोनी जी को शुक्रिया कहना चाहूंगी कि उन्होंने हमें असंभव लग रही चीज को हासिल करने में मदद की.'
In my twenty six year old career as a politician, I thought I had seen it all! But like they say never say never! Nevertheless, I would like to express my heartfelt gratitude to @OmarAbdullah and @Ambikasoni4 ji for helping us achieve the seemingly impossible. 1/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
महबूबा का इशारा राज्य में सरकार बनाने के लिए सहमति बनने की ओर था. बता दें कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ ही पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. हालांकि, विधानसभा भंग होने के बाद इसकी संभावना खत्म हो गई. उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा, 'पिछले पांच महीनों से, राजनीतिक सहयोग की परवाह किए बिना हम इस बात पर राजी थे कि राज्य विधानसभा को तुरंत भंग किया जाना चाहिए ताकि खरीद फरोख्त और दलबदल पर रोक लगाई जा सके.'
Since the past five months, regardless of political affiliations, we shared the view that the state assembly be dissolved immediately to avert horse trading & defections. 2/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
तीसरे ट्वीट में महबूबा ने लिखा, 'आश्चर्यजनक रूप से हमारी मांगें भैंस के आगे बीन बजाने जैसी थीं. लेकिन किसने सोचा था कि महागठबंधन का विचार से ही इतनी घबराहट पैदा हो जाएगी.'
Oddly enough our pleas fell on deaf ears. But who would have thought that the very idea of a grand coalition would give such jitters. 3/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
महबूबा मुफ्ती ने चौथे ट्वीट में लिखा, 'पोस्ट स्क्रिप्ट: आज के तकनीकी दौर में यह काफी अजीब है कि महामहिम राज्यपाल के आवास में हमारा फैक्स नहीं पहुंचा, लेकिन उन्होंने विधानसभा भंग करने का आदेश तुरंत जारी कर दिया.'
PS - In todays age of technology, it is very strange that the fax machine at HE Governor’s residence didn’t receive our fax but swiftly issued one regarding the assembly dissolution. 🤔4/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
महबूबा के पहले ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उमर ने लिखा, 'और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी आपसे सहमत होते हुए आपको रीट्वीट करूंगा, राजनीति सच में अलग तरह की दुनिया है. आगे के संघर्ष के लिए शुभकामनाएं. एक बार फिर से लोगों की बुद्धिमत्ता की जीत होगी.'
And I never thought I’d be retweeting anything you said while agreeing with you. Politics truly is a strange world. Good luck for the battle ahead. Once again the wisdom of the people will prevail. https://t.co/OcN9uRje1s
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) November 21, 2018
यही नहीं, इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने एक GIF को ट्वीट करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा कि राजभवन की फैक्स मशीन इस तरह काम करती है.
Raj Bhavan Jammu fax machine at work 😀 pic.twitter.com/RyLOhvQinc
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) November 21, 2018
महबूबा ने इसका और भी मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और एक फोटो को ट्वीट किया कि जो लोग फैक्स रिसीव होने का इंतजार कर रहे हैं, उनका कुछ ऐसा हाल हो जाएगा.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) November 21, 2018
घाटी में सियासी उठापटक के तनाव के बीच एक दूसरे के धुर विरोधी और अपनी राजनीतिक विरासत के दूसरी पीढ़ी के नेता महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने एक दूसरे के साथ कुछ हल्के पल साझा किए. अब दोनों नेताओं का इस तरह करीब आना घाटी में किस तरह का गुल खिलाएगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा. अब सबकी निगाह इस बात पर है कि क्या जम्मू-कश्मीर चुनाव की ओर बढ़ रहा है या कोई और विकल्प अभी है.