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J-K: फारूक अब्दुल्ला बोले- आम नागरिकों की हत्या करने वाले आतंकियों का नरक में इंतजार

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कट्टरपंथी इस्लाम को भी यह बात समझनी चाहिए कि इस्लाम निर्दोष लोगों को हत्या की इजाजत नहीं देता है. ये लोग गलत कर रहे हैं और इनका नरक में इंतजार हो रहा है. 

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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला. (फाइल फोटो)
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केंद्र सरकार पर अब्दुल्ला ने साधा निशाना
  • पाकिस्तान से बातचीत की फिर की हिमायत

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हो रही हिंसा को लेकर चर्चा की. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कट्टरपंथी लोगों को भी यह बात समझनी चाहिए कि इस्लाम निर्दोष लोगों को हत्या की इजाजत नहीं देता है. ये लोग गलत कर रहे हैं और इनका नरक में इंतजार हो रहा है. इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और फारूक अब्दुल्ला के बीच हुई बातचीत का अंश: 

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सवाल: क्या यह कश्मीर में हिंसा की वापसी है?

हम लंबे समय समय से इसके बारे में सोच रहे थे. जिस पल आर्टिकल 370 हटाया गया, हमें लगा कि चीजें ठीक नहीं होंगी, हालात ज्यादा बिगड़ेंगे और हालात बदतर हो गए.

सवाल: सात लोगों की टारगेट किलिंग की गई, डर है कि हालात 1990 जैसे ना हो जाएं?

अगर आपको याद हो तो यह केवल सात लोगों को हत्या नहीं है. 28 लोगों की हत्या हो चुकी है जिसमें 21 मुस्लिम लोग भी शामिल थे. यह पहले से चलता आ रहा है. लोग अब आवाज उठा रहे हैं जब गैर मुस्लिम लोगों को निशाना बनाया गया है.

सवाल: आप इसे अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से नहीं जोड़ रहे हैं. क्यों न पहले हिंसा की निंदा की जाए?

क्या आपको नहीं लगता कि सरकार पहले दिन से कह रही है कि नोटबंदी और अनुच्छेद 370 हटाने से राज्य में शांति आ रही है? क्या आप यह नहीं देखते हैं? मैने कभी नहीं कहा कि उन्होंने यह कहा. उन्होंने कहा कि जो पहले हो रहा था वह नहीं होगा, तो, आपको यह याद क्यों नहीं है? वे कह रहे थे कि शांति, शांति और शांति है. क्या शांति है?

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सवाल: क्या हम एक कड़ा संदेश नहीं दे सकते? क्यूं ना सभी नेता एकसाथ आएं और एक आवाज में बोलें? क्या कश्मीरियत केवल कागज पर ही है?

मुझे एक आवाज का तो पता नहीं लेकिन हमने आवाज उठाई है, बहुत मजबूती से आवाज उठाई है. मैं पहला शख्स था जो बिंद्रू के घर गया था. मेरी आंखों में आंसू थे क्योंकि वो एक अच्छे इंसान थे. वह तीस साल में कश्मीर से कभी नहीं गए. 1990 में जब हालात खराब थे तब भी बिंद्रू ने कश्मीर नहीं छोड़ा. जब उनसे ऐसा करने के लिए कहा गया तब भी उन्होंने मना किया था और कहा था कश्मीर मेरा घर है.

सवाल: बिंद्रू कश्मीरियत की निशानी थे. जब उनकी हत्या की गई तो इससे कश्मीरियत के विचार पर क्या असर पड़ेगा ? युवा कश्मीरियों का आतंकी बनना क्या आपको चिंतित करता है?

क्या आप नहीं देखते कि देश के बाकी हिस्सों में क्या हो रहा है? मुसलमानों को कैसे निशाना बनाया जा रहा है? क्या आपको नहीं लगता कि हमारे यहां के युवाओं पर प्रभाव पड़ेगा? जब उनके पास कोई नौकरी नहीं थी, और 50,000 नौकरियों का वादा किया गया था. आपको क्या लगता है वे क्या करेंगे? जब आप देखते हैं कि मुस्लिम अधिकारियों को कमतर आंका जाता है, और सभी को बाहर से लाया जाता है, तो आपको क्या लगता है कि उन्हें कैसा लगेगा?

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सवाल: मैं माफी मांगता हूं ये कहने के लिए लेकिन हिंसा के लिए यह व्याख्या नहीं हो सकती. आप हिंसा को जायज नहीं ठहरा सकते हैं. निर्दोष नागरिकों के प्रति हिंसा स्वीकार्य नहीं है. यह बिल्कुल स्वीकार नहीं है. 

कश्मीर में जो हो रहा है हम उसका स्वागत नहीं करते हैं. जो हुआ है वो भयानक है. हम में से कोई भी इसे सही नहीं मानता है. यह बदतर घटना है जो हो रही है. कट्टरपंथी इस्लाम को भी यह बात समझनी चाहिए कि इस्लाम निर्दोष लोगों को हत्या की इजाजत नहीं देता है. ये लोग गलत कर रहे हैं और इनका नरक में इंतजार हो रहा है. 

सवाल: हिंसा को हराने के लिए कश्मीर की सिविल सोसायटी और नेता एक साथ कैसे आएंगे?

पीएम ने जो कहा, दिल से दूरी, दिल्ली से दूरी. यह दूरी भारत सरकार को खत्म करनी है. कोई नहीं चाहता कि निर्दोष लोगों की जान जाए.

सवाल: लोग और मजबूती से आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं? क्या यह डर की वजह से है?

सभी ने सख्ती से आवाज उठाई है. मुझे एक शख्स का नाम बता दीजिए जिसने सख्ती से आवाज ना उठाई हो.

सवाल: हिंसा का यह चक्र कैसे खत्म होगा?

इसके लिए सबसे अच्छा ये रहेगा कि भारत और पाकिस्तान एक साथ बैठे और शांति बहाली पर काम करें. इससे बड़ा बदलाव आएगा. हम हमेशा से कहते आए हैं कि बैठक हो और बातचीत हो.

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