जम्मू-कश्मीर में 5 साल तक प्रशासनिक शक्तियां उप-राज्यपाल (LG), उनके सलाहकारों और सचिवों के हाथ में रही. अब ये शक्तियां नई बनी उमर अब्दुल्ला सरकार को सौंप दी गई हैं. 2019 में धारा 370 हटने के बाद से जो व्यवस्था लागू थी उसे अब खत्म कर दिया गया है और नई चुनी हुई सरकार को कामकाज का जिम्मा सौंपा जा रहा है.
जम्मू-कश्मीर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2020 में जारी किए गए चार अहम आदेशों को रद्द कर दिया है. इन आदेशों के तहत उप-राज्यपाल और उनके सलाहकारों को बड़ी प्रशासनिक शक्तियां मिली थीं और प्रशासनिक परिषद बनाई गई थी, जो बड़े फैसले लेती थी. अब इन आदेशों को रद्द करके नई सरकार को कामकाज का पूरा अधिकार सौंप दिया गया है.
ये आदेश 2019 में राष्ट्रपति के आदेश के तहत जारी किए गए थे, जिनसे उप-राज्यपाल को सरकार चलाने के अधिकार दिए गए थे. क्योंकि, उस समय जम्मू-कश्मीर में कोई चुनी हुई सरकार नहीं थी.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ये प्रक्रिया आम है. जब नई चुनी हुई सरकार बनती है, तो पुराने आदेश खत्म करके नई सरकार को अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वह कामकाज संभाल सके.
हालांकि, अभी भी जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और वित्तीय मामलों में अंतिम फैसला उप-राज्यपाल का होगा. इस वजह से कुछ लोग मान रहे हैं कि नई मुख्यमंत्री को अपनी योजनाएं लागू करने में मुश्किलें होंगी.
हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने अपने बयानों में नरमी दिखाई है और वो केंद्र सरकार के साथ अच्छे संबंध रखने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व ने नई सरकार को विकास में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है. अब देखना होगा कि दोनों राजनीतिक दल, जो कई मुद्दों पर अलग विचार रखते हैं, मिलकर जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए कैसे काम करते हैं और एक साथ कैसे आगे बढ़ते हैं.