जम्मू-कश्मीर में हुए आठ चरणों में हुए डीडीसी चुनावों के वोटों कि गिनती लगातार जारी है, अब रिजल्ट भी आने लगे हैं. ऐसा लग रहा है कि धारा 370 के हटाए जाने के बाद हुए जिला परिषद के चुनाव में कश्मीर की तमाम पार्टियां के साथ आने का फॉर्मूला हिट रहा है. घाटी के छह दलों के (पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) गुपकार गठबंधन को डीडीसीए चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं.
आठ चरण में हुए डीडीसी चुनाव में 280 सीटों पर 51.42 फीसदी मतदान हुआ, जिसमें 2178 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है. अभी तक के आए रुझानों में गुपकार गठबंधन 75 सीटों पर आगे चल रही है जबकि 15 सीटों पर उसके प्रत्याशी जीत चुके हैं. बीजेपी 43 सीटों पर आगे चल रही है और उसके तीन प्रत्याशियों को जीत मिली है. कांग्रेस के 21 प्रत्याशी आगे हैं और उसकी एक सीट पर जीत हो चुकी है. JKAP ने 1 सीट जीत ली है और 6 पर वह आगे चल रही है. 43 सीटों पर अन्य आगे चल रहे हैं और 11 सीटों पर अन्य उम्मीदवार जीत चुके हैं.
बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में महबूबा मुफ्ती की पीडीपी, सीपीएम, सज्जाद लोन की पार्टी जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स कांफ्रेंस और जेकेपीएएम शामिल हैं. ये सभी दल आपसी मतभेद भुलाकर साथ आए थे और डीडीसी चुनाव में इनका किस्मत आजमाना सफल रहा. इससे पहले तक एनसी और पीडीपी कभी साथ चुनाव नहीं लड़े थे.
राज्य की सियासत में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस एक दूसरे के विरोधी रही हैं, लेकिन 370 के हटने बाद साथ आए हैं. गुपकार गठबंधन ने डीडीसी चुनाव में अनुच्छेद 370 की बहाली को मुख्य एजेंडा बनाया. इतना ही नहीं गुपकार गठबंधन जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग करने का भी विरोध कर रही है. इन्हीं सारे एजेंडो को लेकर गुपकार गठबंधन चुनावी मैदान में उतरा था, जिसे घाटी में लोगों का समर्थन मिला है.
बता दें कि केंद्र ने 73वें संशोधन को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू कर दिया. यह पिछले 28 सालों से लंबित पड़ा हुआ था. इस तरह राज्य में तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो गई, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ. इससे कश्मीर में लोकत्रांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी.
जम्मू-कश्मीर में DDC क्या है?
अब जम्मू-कश्मीर में हर जिले में एक जिला विकास परिषद (डीडीसी) होगी, जिसका नगर पालिका क्षेत्रों को छोड़कर पूरे जिले पर अधिकार क्षेत्र होगा. हर डीडीसी में 14 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे. इस तरह, जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में 280 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे. हर डीडीसी में सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी खंड विकास परिषदों के अध्यक्ष और जिले से विधानसभा के सदस्य (विधायक) शामिल होंगे. डीडीसी राज्य में पहले से रहे जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) की जगह लेगा, जिसमें विधायक और मंत्री हिस्सा लेते थे.