जम्मू कश्मीर को लेकर 24 जून को होने जा रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीटिंग ने सियासी पारा बढ़ा दिया है. अटकलों का बाजार गर्म है और तमाम पार्टियों द्वारा तरह-तरह की मांग की जा रही हैं. कुल 14 राजनीतिक दलों को इस मीटिंग के लिए न्योता भेजा गया है जिसमें कांग्रेस, पीडीपी, एनसी जैसे बड़े दल भी शामिल हैं. अब उस महत्वपूर्ण मीटिंग से पहले ही जम्मू कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है.
जम्मू-कश्मीर पर पीएम की मीटिंग, कांग्रेस की मांग
इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी की तरफ से जोर देकर कहा गया है कि अब जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा फिर दे देना चाहिए. पार्टी ने कहा है कि लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए ये फैसला अब लेना जरूरी है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि पार्टी ने इस मुद्दे पर 6 अगस्त 2019 को ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था. हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा मिले. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो ये सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है.
वहीं कांग्रेस की तरफ से कहा गया है कि अब ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को फैसला लेना है कि वे देश हित में जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने जा रहे हैं या नहीं. एक स्वस्थ लोकतंत्र में लोगों को अपना प्रतिनिधित्व चुनने का पूरा अधिकार रहना चाहिए. जम्मू कश्मीर को भी इस हक से वंचित नहीं रखा जा सकता है. वैसे कांग्रेस ने तो अपना स्टैंड साफ कर दिया है, लेकिन इस समय कई दूसरे दल यही फैसला नहीं ले पाए हैं कि उन्हें इस महत्वपूर्ण मीटिंग में हिस्सा लेना है या नहीं.
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महबूबा के जाने पर सस्पेंस
अभी महबूबा मुफ्ती के जाने पर भी सस्पेंस कायम है. ऐसी खबरें हैं कि पीडीपी प्रमुख ने मीटिंग में हिस्सा ना लेने का फैसला लिया है. इस सिलसिले में पार्टी प्रवक्ता सईद सुहेल बुखारी ने कहा है कि रविवार को एक मीटिंग होने जा रही है. उस मीटिंग में महबूबा द्वारा ही फैसला लिया जाएगा कि पीएम की उस बैठक में हिस्सा लेना है या नहीं.
वहीं दो दिन बाद गुपकार गठबंधन की भी इसी सिलसिले में मीटिंग होने जा रही है. वहां भी कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है. अभी तक नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी मीटिंग में जाने पर मुहर नहीं लगाई है. कहा गया है कि फारूख और उमर अब्दुल्ला को न्योता गया है.
जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अहम बैठक में शामिल होने जा रहे तमाम नेताओं को कोविड की निगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य रहेगा. बिना रिपोर्ट मीटिंग का हिस्सा नहीं बना जा सकता है.