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जम्मू-कश्मीर: नतीजों से पहले ही बीजेपी ने कसी कमर, कोर ग्रुप की मीटिंग में रणनीति पर चर्चा

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा कर रही है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने कहा, 'हम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेंगे और सरकार बनाएंगे.'

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जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने बुलाई कोर ग्रुप की मीटिंग
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने बुलाई कोर ग्रुप की मीटिंग

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी कोर ग्रुप की मीटिंग पार्टी मुख्यालय पर चल रही है. बैठक में हिस्सा लेने के लिए केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के इलेक्शन इंचार्ज राम माधव भी बीजेपी दफ्तर पहुंच चुके हैं. जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह भी बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. रविंद्र रैना, कविंद्र गुप्ता, डॉ निर्मल, सुनील सेठी, अशोक कौल और कोर ग्रुप के अन्य सदस्य बैठक में भाग लेंगे. 

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'हम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेंगे'

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा कर रही है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने कहा, 'हम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेंगे और सरकार बनाएंगे.' बता दें कि जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में 90 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग हुई थी.

नतीजे 8 अक्टूबर को आने हैं. इस चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों ने पूर्ण राज्य की बहाली का मुद्दा उठाया है. कविंद्र गुप्ता ने कहा, 'उन मीडिया रिपोर्ट्स में कोई सच्चाई नहीं है जिनमें कहा जा रहा है कि नामांकित सदस्यों के नामों को अंतिम रूप दे दिया गया है. ये महज अटकलें और अफवाहें हैं. यह जम्मू-कश्मीर एलजी का विशेषाधिकार है.'

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सरकार बनाने की संभावनाएं टटोल रही बीजेपी

सी वोटर के एग्जिट पोल में जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई है. हालांकि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के आगे रहने की भविष्यवाणी है लेकिन किसी भी एक राजनीतिक दल को अपने दम पर बहुमत मिलने की संभावना नहीं है. सी वोटर के एक्जिट पोल में बीजेपी को 27 से 32 सीटें तक मिलने की भविष्यवाणी है और ऐसे में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरने की स्थिति में सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशने में जुट गई है.

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी कई निर्दलीय और छोटी पार्टियों के नेताओं से संपर्क में है. बीजेपी ने पर्दे के पीछे से उन्हें समर्थन भी दिया था. पार्टी ने घाटी में इस बार सभी सीटों पर न लड़ने का फैसला इसी रणनीति के तहत किया था.

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