जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश दिया है. बर्खास्त किए जाने वालों में पुलिस कॉन्स्टेबल फिरदौस अहमद भट, टीचर मोहम्मद अशरफ भट और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में अर्दली निसार अहमद खान का नाम शामिल है.मौजूदा वक्त में तीनों कर्मचारी आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में जेल के अंदर हैं.
अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर के 69 सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दी गई हैं.
पिछले साल 30 नवंबर को एलजी मनोज सिन्हा ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकी संबंधों में कथित संलिप्तता के लिए दो सरकारी अधिकारियों की सर्विसेज को खत्म कर दिया था. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उसके समर्थकों पर शिकंजा कसते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया था. इन कर्मचारियों पर आतंकियों को मदद पहुंचाने और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था. सरकारी जांच और खुफिया एजेंसियों के पुख्ता सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी.
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आतंकियों के लिए काम करता था स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी
पहला मामला अब्दुल रहमान नैका का है, जो स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट था. कुलगाम के देवसर इलाके का रहने वाले नैका ने 1992 में स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल असिस्टेंट के तौर पर नौकरी ज्वाइन की थी. जांच में पता चला कि वह लंबे वक्त से आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम कर रहा था.