जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के एक गांव में तीन दशक बाद फिर से एक मंदिर खुला है. कश्मीरी पंडितों ने मुर्रान गांव में बरारी मौज मंदिर में आज विशेष प्रार्थना की. मुर्रान गांव के पंडित और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने तीन दशक से अधिक समय बाद मंदिर के द्वार खोले और विशेष प्रार्थना की और प्रसाद बांटा. मंदिर खुलने से गांव के गैर-प्रवासी पंडित बहुत खुश थे. दोनों समुदायों ने मिलकर हवन किया. पंडितों ने मीडिया को बताया कि मुर्रान गांव में परंपरा है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के सदस्य मिलकर इस अवसर पर खुशियां बांटते हैं.
पंडितों ने कहा, 'आज हम अपने पंडित भाइयों के साथ लंबे समय के बाद यहां एकत्र हुए हैं. हम अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवन कर रहे हैं और मुस्लिम हमेशा से यहां उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते आए हैं.'
1989 में गांव से पलायन करने वाले पंडितों की संपत्ति सुरक्षित है और वे उसी स्थिति में हैं, जिस स्थिति में वे गांव छोड़कर गए थे. आज जब वे हवन में शामिल हुए तो गांव के मुसलमानों ने उनका तहे दिल से स्वागत किया और गांव में दशकों बाद एक साथ धार्मिक आयोजन मनाने का पुराना माहौल दिखा.
दो विस्फोटक बरामद
बता दें कि पुलवामा हमेशा से आतंकवाद का गढ़ रहा है. अक्सर यहां से आतंक से जुड़ी खबरें आती रहती हैं. पुलवामा में मंगलवार को दो विस्फोटक उपकरणों की बरामदगी के मामले में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के तीन ओवर ग्राउंड संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. लगभग छह किलोग्राम वजन वाले विस्फोटक उपकरण को रविवार को बरामद किया गया था जिसे नष्ट कर दिया गया है.
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी ने कहा, '3 जून को लश्कर कमांडर रेयाज डार और उसके सहयोगी रईस डार की मौत के बाद आगे की जांच के दौरान, पुलिस ने मारे गए आतंकवादियों के ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क से विस्फोटक बरामद किए हैं.' उन्होंने कहा कि मारे गए आतंकवादियों को आश्रय और रसद सहायता प्रदान करने के लिए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
अभी दो दिनों पहले ही जम्मू-कश्मीर के रियासी इलाके में तीर्थयात्रियों से भरी बस पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था जिसके बाद बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई थी.