जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाई कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. इसके तहत सरकार ने रोशनी एक्ट के अंतर्गत मालिकाना अधिकार पाने वाले प्रदेश के आम नागरिकों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट से पुराने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है. सरकार ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए तर्क दिया है कि धनाढ्य और वीआईपी लोगों से इतर आम लोगों को इस मामले में राहत दी जाए.
इससे पहले हाई कोर्ट ने सरकार से रोशनी एक्ट के तहत जमीनों के मालिकाना अधिकार खारिज कर जमीन वापस लेने का आदेश दिया था. अब इस मामले में 11 दिसंबर यानी कि शुक्रवार को सुनवाई होगी.
न्यायालय के लगभग दो महीने पुराने फैसले में संशोधन के अनुरोध वाली याचिका में कहा गया है कि इससे बड़ी संख्या में आम लोग अनायास ही पीड़ित हो जाएंगे जिनमें भूमिहीन कृषक और ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जोकि स्वयं छोटे से टुकड़े पर घर बनाकर रह रहे हैं.
याचिका के मुताबिक, लाभार्थियों में से आम लोगों और जमीन पर कब्जा जमाने वाले अमीर लोगों के बीच फर्क करने की आवश्यकता है. साथ ही भूमिहीन मजदूरों अथवा ऐसे लोगों को आवंटित भूमि का कब्जा बरबरार रखने की अनुमति का पक्ष लिया गया जोकि खुद ही उस जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं.
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अदालत ने नौ अक्टूबर को इस अधिनियम को ''अवैध, असंवैधानिक एवं अरक्षणीय'' करार दिया था और रोशनी एक्ट के तहत आवंटित की गई भूमि के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. उल्लेखनीय है कि रोशनी एक्ट को वर्ष 2001 में लागू किया गया था, जिसके तहत राज्य की भूमि पर कब्जा जमाए लोगों को इसका मालिकाना हक देने के एवज में प्राप्त रकम को बिजली उत्पादन परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की परिकल्पना की गई थी.
कोर्ट के आदेश में सभी तरह के सरकारी जमीन पर कब्जे और रोशनी एक्ट के तहत उनका नियमतिकरण रद्द किए जाने के साथ-साथ, इस मामले में लिप्त लोगों के नाम भी उजागर करने की बात कही थी. इसके बाद से ही लोगों के नाम सार्वजनिक किया जाना शुरू कर दिया गया था.