जम्मू कश्मीर सचिवालय ने मुख्य सचिव के कार्यालय से सभी विभाग प्रमुखों को प्रधानमंत्री पैकेज के तहत आने वाले कर्मचारियों और अन्य अल्पसंख्यक कर्मचारियों का वेतन जारी करने का निर्देश देने के लिए कहा है. इन कर्मचारियों ने कश्मीर डिवीजन में अपना काम फिर से शुरू कर दिया है. धरने पर बैठे सरकारी कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं किया जाएगा. आदेश के अनुसार, केवल उन लोगों का वेतन जारी किया जाएगा जो काम पर वापस लौट आए हैं और काम फिर से शुरू कर चुके हैं.
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के कर्मचारियों ने लंबे समय तक धरना दिया था. उनकी कई मांगे थीं जिनपर सभी ने धरना दिया था. पिछले वर्ष नवंबर में सरकारी कर्मचारी कश्मीरी पंडितों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बयान को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. आजतक के एक सवाल के जवाब में एलजी मनोज सिन्हा ने कहा था कि कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारी अगर काम पर नहीं लौटते हैं, तो उन्हें वेतन नहीं दे सकते. एलजी मनोज सिन्हा ने घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों और जम्मू क्षेत्र के अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों का वेतन जारी करने से इनकार कर दिया था. लेकिन फिर टारगेट किलिंग के बाद वेतन देना पड़ा था.
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का वेतन रोकने और उन्हें घाटी में वापस आने की सरकार के आदेश को लेकर कहा था कि अगर ये व्यवस्था बंद नहीं की गई तो कश्मीरी पंडित सभा (KPS) अपना आंदोलन तेज करेगी. प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत घाटी में तैनात केपी कर्मचारियों का आंदोलन कई दिनों तक जारी रहा. जिसमें उनकी मांग रही कि उन्हें घाटी से निकालकर मैदानी इलाकों में पोस्टिंग मिले.
प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि अब समय आ गया है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में शरणार्थी के रूप में रह रहे कश्मीरी हिंदू समुदाय को वापस घाटी में लाए और उनका सुरक्षा-सम्मान के साथ पुनर्वास करे.