एशिया का सबसे बड़ा Tulip Garden आज से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. इस बार कश्मीर की घाटी 16 लाख फूलों से महकेगी. यहां की डल झील और जबरवान पहाड़ियों के बीच स्थित एशिया का सबसे बड़ा इंदिरा गांधी ट्यूलिप गार्डन पूरी तरह खिल चुका है. पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है.
ट्यूलिप गार्डन के प्रभारी इनाम-उल-रहमान ने कहा कि बागबानी, इंजीनियरिंग, फफूंदनाशक उपचार, पोषक तत्वों का छिड़काव और मामूली मरम्मत जैसी तैयारियां हम ट्यूलिप शो से पहले कर चुके हैं. यह गार्डन जनता के लिए खुला हुआ है.
उन्होंने बताया कि विभिन्न रंगों के 1.6 मिलियन (16 लाख) ट्यूलिप के अलावा, वसंत फूल, जैसे जलकुंभी, डैफोडील्स, मस्करी और साइक्लेमेन, प्रदर्शित किए जाएंगे.
रहमान ने कहा कि हर साल हम इस उद्यान का विस्तार करते हैं और यहां फूलों की नई किस्में आती हैं. इस साल हमने फाउंटेन चैनल का विस्तार किया है. इससे दुनियाभर में बागवानी का एक उदाहरण बनेगा.
उन्होंने कहा कि इस साल पीले, लाल, क्रिमसन, बैंगनी और सफेद सहित ट्यूलिप रंगों का इंद्रधनुषी प्रदर्शन होगा. उन्होंने कहा कि जबरवान पहाड़ियों की छाया इस गार्डन को और अच्छा माहौल देती है. लोग इस बगीचे को पसंद करते हैं.
बगीचे के पर्यवेक्षक मुश्ताक अहमद मीर ने कहा कि ट्यूलिप गार्डन की तैयारियां की जा चुकी हैं. इस सीजन में गार्डन में भारी भीड़ की उम्मीद है. इसको लेकर टीम ने दिन-रात काम किया है. हमारे पास गार्डन के उद्घाटन को लेकर कश्मीर के बाहर से फोन आ रहे थे. उन्होंने कहा कि पिछले साल यहां अच्छा सीजन रहा. यहां दो लाख लोग आए थे. हमें उम्मीद है कि इस बार का सीजन और बेहतर होगा.
तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने की थी शुरुआत
पूर्व में सिराज बाग के नाम से जाना जाने वाला इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन 2008 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा खोला गया था. आजाज ने घाटी में सर्दी और गर्मी के मौसम के बीच कम पर्यटकों के आने को लेकर इसकी शुरुआत की थी.
ट्यूलिप तीन से पांच सप्ताह तक ही खिला रहता है. इसके लिए ग्राउंड स्टाफ साल भर कड़ी मेहनत करता है. कोशिश रहती है कि इसकी गुणवत्ता साल दर साल बनी रहे.
मई और जून में की जाती है कटाई
मीर ने कहा कि हम साल भर मार्च-अप्रैल में फूलों के इस प्रदर्शन को लेकर तैयारी करने में व्यस्त रहते हैं. बीमारियों को लेकर भी ट्यूलिप की जांच करते हैं. मई और जून में हम कटाई शुरू करते हैं, जिसमें तीन महीने लगते हैं. अक्टूबर में मिट्टी की खुदाई और खाद डालने का काम किया जाता है. नवंबर में ट्यूलिप लगाते हैं.
साल भर बागवान इसी में व्यस्त रहते हैं. बागवान मोहम्मद मकबूल ने कहा कि ट्यूलिप बहुत ही नाजुक फूल होते हैं और कम तापमान पर ही खिलते हैं. प्रमुख माली गुलाम हसन ने कहा कि यह गार्डन 1,050 कनाल (52.5 हेक्टेयर) में फैला हुआ है. इसकी शुरुआत 50,000 ट्यूलिप, फिर 3.5 लाख ट्यूलिप और अब, 16 लाख फूल हैं. हसन चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग गार्डन घूमने आएं.