श्रीनगर लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में वोटिंग के दौरान बडगाम और श्रीनगर के दूसरे इलाकों में हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा इसमें कुछ निर्वाचन अधिकारियों सहित 36 लोग घायल भी हुए हैं. इस हिंसा के कारण यहां महज 6.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो तीन दशक में राज्य का सबसे कम मतदान है.
दरअसल बडगाम जिले के एक पोलिंग बूथ और वहां के कर्मचारियों पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों को गोलियां चलानी पड़ीं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बडगाम जिले में तीन जगहों पर सुरक्षा बलों के साथ झड़प के दौरान सात लोगों की मौत हो गई, जबकि गांदरबल में एक व्यक्ति झड़प के दौरान मारा गया.
श्रीनगर से मिल रही खबरों के मुताबिक, चरार-ए-शरीफ विधानसभा क्षेत्र के दलवान गांव में हिंसक भीड़ ने एक मतदान केंद्र पर हमला कर दिया और वोटिंग में रुकावट डालने के लिए ईवीएम मशीनों से तोड़फोड़ की. इसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं. इस गोलीबारी में 36 लोग घायल हो गए, जिनमें से 8 लोगों की बाद में मौत हो गई. इस घटना के बाद से इलाके में तनाव व्याप्त और सुरक्षा बलों हालात को सामान्य बनाने में जुटे हैं.
कश्मीर की विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी ने आज भड़की इस हिंसा को केंद्र, राज्य सरकार और चुनाव आयोग की नाकामी करार दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि यह सरकार शांतिपूर्ण माहौल देने में असफल रही है, नहीं तो शांति से चुनाव हो जाते. वहीं उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'राजनीति के अपने 20 वर्षों में मैंने चुनाव और प्रचार के लिए इतनी खराब स्थिति कभी नहीं देखी. यह राज्य सरकार, केंद्र और चुनाव आयोग की असफलता है.'
इस बीच, घाटी के तीन चुनावी जिलों में अलगाववादी समूहों की बुलाई हड़ताल की वजह से आम जनजीवन ठप्प पड़ा. अलगाववादी समूहों ने लोगों से चुनाव प्रक्रिया से दूर रहने को कहा था. अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर, बडगाम और गंदरबल जिलों में ज्यादातर दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे. सड़कों से सार्वजनिक वाहन भी नदारद थे. उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ निजी वाहन सड़कों पर नजर आए.