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शोपियां फेक एनकाउंटरः सेना के कप्तान ने 3 मजदूरों को अगवा कर मारी थी गोली, जानिए पूरी कहानी

एनकाउंटर से एक रात पहले 17 जुलाई को सेना के अधिकारी भूपेंद्र ने अपने दो सिविल साथियों ताबिश नजीर मलिक और बशीर अहमद लोन से रेशनागरी इलाके में मौजूद सेना के कैंप में मुलाकात की थी. उस दिन बशीर अहमद लोन की कार जेके-22 बी 3365 से कैंप में पहुंचे थे. जांच से यह भी पता चला है कि आर्मी कैप्टन भूपेंद्र काफी समय से इन दोनों के संपर्क में था.

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इन तीन युवकों को आतंकी बताकर फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था
इन तीन युवकों को आतंकी बताकर फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कैप्टन भूपेंद्र ने रची थी फेक एनकाउंटर की साजिश
  • गोली मारने के बाद शवों के पास रखे गए थे हथियार
  • आरोपी कैप्टन के दो साथी हो चुके हैं गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां फर्जी मुठभेड़ मामले में एक आरोप पत्र दाखिल करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है. चार्जशीट में बताया गया कि कैसे सेना का एक कप्तान और उसके दो साथी तीन बेगुनाह मजदूरों को अगवा कर मौका-ए-वारदात पर ले गए और फिर वहां उनकी गोली मारकर हत्या कर दी.  

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आरोप पत्र में खुलासा किया गया है कि कैसे तीनों पीड़ितों को सेना के कप्तान भूपेंद्र और उसके दो सहयोगी पहले से वहां खड़े एक वाहन में ले गए थे. फिर उन्हें एक बाग के पास मौके पर ले जाया गया. फिर उन तीनों को गोली मारने से पहले उन्होंने वहां से जाने के लिए कहा था. जांचकर्ताओं ने सभी घटना के क्रम को जोड़कर इस नाटकीय मुठभेड़ का खुलासा किया है. चार्जशीट के अनुसार, सेना के कप्तान भूपेंद्र सिंह उर्फ ​​मेजर बशीर खान ने अपने दो साथियों की मदद से उन तीन युवकों का अपहरण कर लिया था.

अपहरण के बाद उन्होंने तीनों युवकों को मार डाला. उनके मृत शरीर के पास अवैध हथियार और सामग्री रखी गई. फिर मारे गए तीनों युवकों को सेना के कप्तान भूपेंद्र ने हार्ड-कोर आतंकवादी करार दिया था. हालांकि बाद में उनकी पहचान जम्मू-कश्मीर के राजौरी निवासी इबरार अहमद (16), इम्तियाज अहमद (25) और इबरार अहमद (20) के रूप में की गई.

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चार्जशीट में सेना के कप्तान भूपेंद्र और उसके दो (सिविल) साथियों पर फेक मुठभेड़ का आरोप लगाया गया है. उन पर एक आपराधिक साजिश के तहत सबूत नष्ट करने और एक मकसद के साथ गलत जानकारी पेश करने का भी इल्जाम है. जांच के अनुसार इस फेक एनकाउंटर का मकसद एक पुरस्कार राशि हासिल करना था.

फर्जी मुठभेड़ की योजना
जांच के अनुसार, एनकाउंटर से एक रात पहले 17 जुलाई को सेना के अधिकारी भूपेंद्र ने अपने दो सिविल साथियों ताबिश नजीर मलिक और बशीर अहमद लोन से रेशनागरी इलाके में मौजूद सेना के कैंप में मुलाकात की थी. उस दिन बशीर अहमद लोन की कार जेके-22 बी 3365 से कैंप में पहुंचे थे. जांच से यह भी पता चला है कि आर्मी कैप्टन भूपेंद्र काफी समय से इन दोनों के संपर्क में था.

आर्मी कैंप से निकलने के बाद तीन सैनिकों को एक अलग कार में छोड़ दिया गया, जो आरोपी कैप्टन ने पहले से अरेंज की थी. 62 आरआर से आए लोगों ने 17 जुलाई को शाम 6:30 बजे के आस-पास किसी नागरिक से पंजीकरण संख्या- डीएल8सी यू 0649 का इंतजाम किया था. इसी कार से कैप्टन और उसके दो साथी ताबिश और बशीर रात में चौगाम इलाके में पहुंचे और वहां किराए के मकान में रहने वाले तीनों मजदूरों को अगवा कर लिया. अपहरण से कुछ घंटे पहले ही वे तीनों पीड़ित राजौरी से शोपियां काम की तलाश में आए थे. 

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चार्जशीट के मुताबिक एक सफेद रंग की निजी कार मारुति सुजुकी ए स्टार (पंजीकरण संख्या- डीएल8सी यू 0649) आरोपी कैप्टन भूपेंद्र अवैध हथियार और सामग्री के साथ अरेंज की थी. उसे चौगाम, शोपियां भेजा गया. उसी कार में रिहायशी इलाके में मौजूद किराए के मकान से तीन पीड़ितों का अपहरण किया गया था. फिर उसी कार का इस्तेमाल मौका-ए-वारदात पर जाने के लिए गया, जो पीड़ितों के घर से चंद कदम की दूरी पर एम्सिपोरा में थी.

जांच के अनुसार, साइट पर पहुंचने के बाद कप्तान भूपेंद्र ने उन तीनों को कार से बाहर निकालकर गोली मार दी. इसके बाद आरोपी भूपेंद्र ने उनकी लाशों के पास अवैध हथियारों और सामग्री को रख दिया. फिर उन्हें कट्टर आतंकवादियों के रूप में दर्शाने की कोशिश की.

पहले तीनों मृतकों के बारे में सेना ने दावा किया था कि उनके पास से हानिकारक सामग्री, दो मैगजीन, दो पिस्तौल और चार खाली कारतूस, 15 जीवित कारतूस और एक असॉल्ट राइफल मय 15 खाली कारतूस बरामद हुई थी. 

अब तक की गई ये कार्रवाई
पुलिस ने 28 सितंबर 2020 को राजौरी के बेगुनाह लोगों का फर्जी एनकाउंटर करने के आरोप में सेना के कप्तान भूपेंद्र के दो साथियों ताबिश और बशीर को गिरफ्तार किया. अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, सेना के आरोपी अधिकारी भूपेंद्र को अभी भी सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) और आर्मी एक्ट के आगे की कार्रवाई के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है. जबकि उसके खिलाफ मुकदमा शुरू करने के लिए मंजूरी लेनी भी आवश्यक है.

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अदालत में बताया गया कि 62 आरआर के सीओ ने जानकारी दी है कि आरोपी कैप्टन भूपेंद्र सिंह 15 अगस्त 2020 से गिरफ्तारी के तहत बंद रखा गया है. जिसे एसआईटी के समक्ष पेश किया गया था. एसआईटी ने उससे पूछताछ भी की. साथ ही आईआर (पूछताछ रिपोर्ट) दर्ज की गई थी.

पिछले सप्ताह जारी किए गए एक बयान में सेना की ओर से कहा गया कि समरी ऑफ एविडेंस को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है. आगे की कार्यवाही के लिए संबंधित अधिकारी कानूनी सलाहकारों से परामर्श कर रहे हैं. जांच की जा रही है. भारतीय सेना नैतिक आचरण को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. आगे की जानकारी भी जल्द ही साझा की जाएगी ताकि सैन्य कानून के तहत कार्यवाही ना रुके.

ये था पूरा मामला
इसी साल 18 जुलाई को, शोपियां के एम्सिपोरा में फर्जी मुठभेड़ में तीन मजदूर मारे गए थे. उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थी. जिसके बाद जम्मू के राजौरी जिले में तीन परिवारों ने दावा किया कि मृतक उनके परिजन थे. जो शोपियां में मजदूरी करने के लिए गए थे.

मामले ने तूल पकड़ा तो जांच शुरू हुई. पुलिस ने शवों का डीएनए प्रोफाइलिंग किया, जिसके नमूने 25 सितंबर को राजौरी में पीड़ित परिवारों को मिले. उससे यह साबित हुआ कि वे तीनों आतंकवादी नहीं बल्कि मजदूर थे, जो एम्सिपोरा में काम कर रहे थे. 3 अक्टूबर 2020 को, लगभग 70 दिनों के बाद तीनों मजदूरों के शव निकाले गए और परिवारों को सौंपे गए. वे उन्हें दफन के लिए राजौरी ले गए थे.

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