scorecardresearch
 

राहुल गांधी का दो दिवसीय कश्मीर दौरा, कांग्रेस के लिए घाटी में अब क्या बचा है?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का कश्मीर दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब राज्य से 370 खत्म किये जाने के दो साल पूरे हुए हैं और हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक कर राज्य का दर्जा बहाल करने और चुनाव कराने का भरोसा दिया था. ऐसे में राहुल गांधी सियासी समीकरण साधने की कवायद करते नजर आएंगे?

Advertisement
X
राहुल गांधी
राहुल गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राहुल गांधी कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर
  • 370 पर राहुल गांधी क्या लेंगे राजनीतिक स्टैंड
  • जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पहली बार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंचेंगे. राहुल गांधी का कश्मीर दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब राज्य से 370 खत्म किये जाने के दो साल पूरे हुए हैं और हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की थी. ऐसे में क्या राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे के जरिए सियासी समीकरण साधने की कवायद करते नजर आएंगे? 

Advertisement

राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर दौरे से सूबे की सियासी मिजाज की थाह लेने के साथ-साथ सोमवार देर शाम जम्मू कश्मीर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर के बेटे की शादी में शामिल होंगे. वहीं, मंगलवार को राजधानी श्रीनगर में जम्मू कश्मीर कांग्रेस के नए दफ्तर का उद्घाटन, साथ ही मंदिर में दर्शन करने और हजरत बल की दरगाह पर जियारत करेंगे. 

राहुल गांधी मंगलवार को सुबह 9 बजेखीर भवानी मंदिर के दर्शन करेंगे. खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से एक घन्टे की दूरी पर गांदरबल में स्थित है. इसके बाद राहुल गांधी श्रीनगर स्थित हजरत बल मस्जिद जाएंगे. दोनों ही बड़े धार्मिक स्थल हैं. इसके अलावा राहुल गुरुद्वारा छठी पादशाही और सन्त शेख हमजा मखदूम की मजार पर भी जा सकते हैं. धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकने के बाद राहुल गांधी कांग्रेस के नए दफ्तर का उद्घाटन करेंगे और इसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे. 

Advertisement

जम्मू कश्मीर में दो गुटों में बंटी कांग्रेस!

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस दो गुटों में बंटी हुई हैं. एक गुट गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में सक्रिय है तो दूसरे कमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर संभाल रहे हैं. कांग्रेस के दोनों ही नेता जम्मू क्षेत्र से आते हैं. पिछले दिनों गुलाम नबी आजाद ने जी-23 नेताओं के साथ राज्य का दौरान किया था, जिससे गुलाम अहमद मीर ने पूरी तरह दूरी बना रखी थी. वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे. 

गुलाम नबी आजाद ने राज्य में कई कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन्होंने अपने विश्वासपात्र कई कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात कर भविष्य की रणनीति की रूपरेखा खींची थी. वहीं, अब राहुल गांधी अब गुलाम अहमद मीर के बेटे की शादी में शिरकत कर रहे हैं, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. 

राहुल का यह दौरा कई मायने में अहम माना जा रहा है, क्योंकि 370 खत्म होने के बाद पहली बार श्रीनगर पहुंचेंगे. हालांकि, 370 हटाए जाने के दो हफ्ते बाद ही 24 अगस्त 2019 में हालात का जायजा लेने राहुल गांधी विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीनगर पहुंचे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस लौटा दिया था. ऐसे में राहुल गांधी दो साल के बाद अब जम्मू कश्मीर की स्थिति को लेकर क्या बयान देते हैं और 370 पुनर्बहाली को लेकर उनका रुख क्या रहता है? 

Advertisement

बता दें कि मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर इसे केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया था और  और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों-लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर में बांटने का फैसला किया था. राज्य से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को कांग्रेस ने असंवैधानिक करार दिया था. साथ ही कांग्रेस जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करती रही है. 

वहीं, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक हुई थी, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 8 राजनीतिक दलों के 14 नेता शामिल हुए थे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए हम वचनबद्ध हैं. दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी कम होगी. साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया के बाद राज्य में चुनाव कराने का भी भरोसा दिया था. 

जम्मू कश्मीर में तेजी से गिरा कांग्रेस का ग्राफ

बता दें कि 2014 के बाद से जम्मू-कश्मीर में बीजेपी का सियासी ग्राफ काफी तेजी से बढ़ा तो कांग्रेस का जनाधार पूरी तरह से खिसक गया है. कांग्रेस के पास राज्य से एक भी सांसद नहीं है. वहीं, 370 के खत्म होने के बाद जम्मू क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है, जहां कभी कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ हुआ करती थी. कश्मीर क्षेत्र में नेशनल कॉफ्रेंस और पीडीपी की पकड़ है. ऐसे में कांग्रेस के सामने राज्य में अपने खोए हुए सियासी जनाधार को भी पाने की चिंता है. हाल ही में डीडीसी के चुनाव में कांगेस कोई खास असर नहीं दिखा सकी है. ऐसे में देखना है कि राहुल अपने दौरे कांग्रेस में क्या सियासी जान डाल पाते हैं कि नहीं? 

Advertisement
Advertisement