शिवसेना ने जम्मू और कश्मीर को अलग करने की मांग उठाई है. शिवसेना नेताओं ने शुक्रवार को जम्मू प्रेस क्लब में यह मांग उठाई. शिवसेना नेताओं की मांग है कि जम्मू को अलग दर्जा मिला, जम्मू की अलग विधानसभा और वैधानिक अधिकार मिलें. बाला साहेब ठाकरे, जम्मू और कश्मीर यूनिट के अध्यक्ष मनीष साहनी की अध्यक्षता में कार्यकर्ताओं ने यह मांग दोहराई.
शिवसेना नेताओं ने कहा कि कश्मीर की गलतियों और भेदभाव को अब स्वीकारा नहीं जाएगा. अब समय आ चुका है कि जम्मू अपना भविष्य खुद तय करे. मनीष साहनी ने कहा कि कहा कि जम्मू को केंद्र शासित प्रदेश बनना मंजूर है लेकिन कश्मीर के साथ बने रहना कतई मंजूर नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले 73 सालों से जम्मू भेदभाव के साथ कश्मीरी नेताओं की गलतियों का खमियाजा भी भुगत रहा है, जो आज भी जारी है.
जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीने जाने का मुख्य कारण भी कश्मीर में सक्रिय आंतकवाद और कश्मीरी नेताओं की विवादास्पद सोच रही है. साहनी ने कश्मीरी नेताओं को मौकापरस्त बताते हुए कहा कि आज भी कश्मीर के नेता धारा 370 की बहाली और दुश्मन देश पाकिस्तान और चीन का राग अलापने का कोई मौका नहीं छोड़ते.
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कश्मीरी नेताओं का साथ नहीं मंजूर!
शिवसेना नेताओं का कहना है कि भारतीय संविधान और निशान के लागू होने का विरोध जताने वालों के साथ तो जम्मू कतई नहीं बने रहना चाहता. साहनी ने कहा कि केऐएस, केपीएस, शेर-ए-कश्मीर आदि अवार्ड से 'जे' हमेशा गायब था. उनका इशारा जम्मू से था. उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह के जन्मदिवस पर अवकाश आज तक नहीं मिल पाया. जम्मू एम्स को लेकर भी हमें सड़कों पर उतरना पड़ा था. आज भी हिन्दू नेताओं को कश्मीर में जाने से रोका जाता है.
मनीष साहनी ने कहा कि 1989-90 में आंतकवादी घटनाओं की वजह से पलायन के लिए मजबूर हुए हिंदू कश्मीरी पंडितों की आज तक घर वापसी नहीं हो सकी है. उन्होंने मौजूदा और पूर्व केन्द्र सरकारों पर भी कश्मीर केन्द्रित होने का आरोप लगाया. साहनी ने कहा कि आज भी जम्मू कश्मीर को लेकर मुख्य फैसले पर जम्मू को नजरंदाज कर कश्मीर के नेताओं के साथ बैठकों को महत्व दिया जाता है.
कश्मीर से अलग होने के अलावा विकल्प नहीं!
शिवसेना नेता ने कहा कि हमारे सब्र का बांध टूट चुका है और अब हमारे पास कश्मीर से अलग होने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है. आज भी केंद्र सरकार द्वारा जारी औद्योगिक विकास के पैकेज, राहत पैकेज, ऑक्सीजन प्लांट्स, स्वास्थ सुविधाएं, केसर प्रोत्साहन योजना और पर्यटन विकास से लेकर नौकरियों तक में जम्मू के साथ बंदर बांट हो रही है.
उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग का सन 2011 के अधार पर जनगणना से भी जम्मू को निराशा के सिवा कुछ हाथ लगा. साहनी ने कहा कि समय आ चुका है कि हम अपने भविष्य, पहचान एवं सांस्कृतिक की सुरक्षा के लिए एकजुटता के साथ अलग जम्मू की आवाज बुलंद करें.
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