जम्मू-कश्मीर के शोपियां फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की है. इस केस में आर्मी कैप्टन सहित तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है. शोपियां के असीमपुरा में पांच महीने पहले तीन युवाओं को गोली मारे जाने के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिला अदालत में आरोपपत्र दायर किया है.
शोपियां के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में शनिवार को पेश पुलिस चार्जशीट में दावा किया गया है कि तीन युवाओं को अगवा किया गया और फिर एनकाउंटर के नाम पर उन्हें गोली मार दी गई. चार्जशीट में कहा गया है कि, 'सेना के अधिकारी और दो अन्य ने जानबूझकर मानकों (SOP) का पालन नहीं किया और उन्होंने हार्डकोर आतंकी साबित करने के लिए युवकों के शवों के पास अवैध हथियार और सामग्री रखी दी थी, और यही नहीं...इन्होंने जानबूझकर अपने सहयोगियों और सीनियर्स को भी इसके बारे में गलत जानकारी दी थी.'
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चश्मदीदों के बयान के आधार पर क्राइस सीन क्रीएट किया. इसमें वो जगह भी शामिल है, जहां पीड़ितों को गोली मारी गई थी. जांच-पड़ताल के दौरान 49 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे. बाद में एक चश्मदीद सरकारी गवाह बन गया था.
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक शोपियां कोर्ट ने एक आदेश जारी किया है जिसमें सेना के अधिकारियों को कानून की संबंधित धाराओं के तहत अपनी राय देने के लिए कहा गया है कि क्या 62 आरआर के आरोपी कैप्टन भूपेंद्र सिंह उर्फ मेजर बशीर खान के खिलाफ सामान्य न्यायालय में ट्रायल चलेगा या कोर्ट मार्शल होगा.
बता दें कि इस वर्ष 18 जुलाई को हीरपोरा पुलिस थाने में सूचना मिली कि असीमपुरा गांव में सेना के 62RR बटालियन ने एनकाउंटर में तीन अज्ञात आतंकी मार गिराये हैं. पुलिस को मिली सूचना के मुताबिक आंतकियों के पास से दो पिस्तौल के साथ दो मैगजीन और गोलियां मिली थीं. मुठभेड़ स्थल से एके सीरीज के हथियार भी बरामद बताए गए थे.
कैसे उजागर हुआ मामला
बहरहाल, जांच के दौरान, मारे गए लोगों की पहचान करने के लिए सभी प्रयास किए गए लेकिन सभी व्यर्थ रहे. पीड़ितों की पहचान का पता लगाने के लिए जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सभी पुलिस थानों के साथ-साथ देश के सभी पुलिस स्टेशनों पर सिग्नल भेजा गया.
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मुठभेड़ के एक महीने बाद राजौरी जिले से पता चला कि अबरार अहमद, इम्तियाज अहमद, मोहम्मद अबरार नाम के तीन युवक श्रमिक के रूप में काम करने के लिए गए थे. लेकिन मुठभेड़ के बाद से उनके ठिकाने का पता परिवार को नहीं चला. शिकायत के तुरंत बाद शोपियां की एक पुलिस टीम को दावेदार परिवारों से डीएनए सैम्पल एकत्र करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था. DNA सैम्पल की जांच के लिए डॉक्टरों और राजौरी के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की एक टीम गठित की गई. डीएनए का सैम्पल CFSL चंडीगढ़ भेजा गया. डीएनए सैम्पल में पुष्टि हुई कि शव राजौरी के 3 लापता युवकों के थे.
डीएनए रिपोर्ट के बाद एसआईटी गठित की गई. आर्मी कैप्टन के स्रोतों के रूप में दो लोगों की पहचान की गई जिनकी शिनाख्त ताबिश नजीर और बिलाल अहमद लोन के रूप में की गई. उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन हीरपोरा में बुलाया गया और उन्हें तत्काल मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि 62RR के कैप्टन भूपेंद्र सिंह उर्फ मेजर बशीर खान को सेना ने कानून की संबंधित धाराओं के तहत हिरासत में लिया था. बिलाल अहमद लोन बाद में सरकारी गवाह बन गया.