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Z Morh Tunnel के काम को रोकने के लिए आतंकियों ने किया था हमला, 6.5 KM लंबा ये टनल क्यों है खास

जम्मू-कश्मीर की बेहद अहम जेड मोड़ टनल का उद्घाटन हो गया. रणनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट को पूरा करना इतना आसान नहीं था. तीन महीने पहले ही इस प्रोजेक्ट पर एक आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 7 कर्मचारियों की मौत हो गई थी.

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ये तस्वीर सोनमर्ग की Z-Morh Tunnel के एंट्रेंस की है (फोटो- X/OmarAbdullah)
ये तस्वीर सोनमर्ग की Z-Morh Tunnel के एंट्रेंस की है (फोटो- X/OmarAbdullah)

20 अक्टूबर 2024... रविवार का दिन था. सोनमार्ग की Z-मोड़ टनल पर काम करने के बाद शाम ढलते ही मजदूर अपने कैंप में वापस लौट आए. सभी कर्मचारी अपनी मैस में पहुंचकर खाना खा रहे थे कि तभी करीब 8.30 बजे अचानक दो से तीन हथियारबंद आतंकी वहां पहुंच गए और खाना खा रहे कर्मचारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इस कायराना आतंकी हमले में 7 लोग मारे गए.

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इस घटना के तीन महीने बाद अब सामरिक-रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण Z-मोड़ टनल का उद्घाटन हो गया. अब श्रीनगर और करगिल के बीच 12 महीने निर्बाध संपर्क जारी रहेगा और श्रीनगर से लेह के बीच यात्रा में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा.

मारे गए थे ये कर्मचारी

आतंकी हमले में 7 लोग मारे गए थे, जिनमें गुरमीत सिंह गुरदासपुर (पंजाब) डॉ. शाहनवाज निवासी (बडगाम) मोहम्मद हनीफ (बिहार) अनिल कुमार शुक्ला, मैकेनिकल मैनेजर (मध्य प्रदेश), फहीम नासिर, सुरक्षा प्रबंधक (बिहार) कलीम (बिहार), शशि अबरोल, डिजाइनर (जम्मू) शामिल थे. 

5 को किया गया था रेफर

इससे पहले की कोई कुछ समझ पाता, वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकी वहां से फरार हो गये. इस कायराना आतंकी वारदात में 7 लोगों की मौत हो गई. अटैक में 5 वर्कर गंभीर रूप से घायल हो गये थे, जिन्हें इलाज के लिये श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया था.

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TRF ने ली थी जिम्मेदारी

आतंकियों की फायरिंग में दो गाड़ियां भी जलकर खाक हो गईं थीं. इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी. ये आतंकी संगठन 2019 में वजूद में आया था. गृह मंत्रालय इस पर प्रतिबंध भी लगा चुकी है. टीआरएफ हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है.

क्यों खास है जेड मोड प्रोजक्ट

जेड-मोड़ टनल मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में गगनेर को सोनमर्ग से जोड़ती है. 2680 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई 6.5 किलोमीटर लंबी जेड-मोड़ टनल श्रीनगर और सोनमर्ग के बीच बनाई गई है. यह टनल 932 गगनगीर के पास हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र को बायपास करती है. इसका उद्देश्य श्रीनगर और सोनमर्ग के बीच पूरे साल संपर्क प्रदान करना है. टनल के आकार की वजह से इसे Z-मोड़ कहा जाता है और इसमें दो लेन की सड़क बनाई गई है. टनल का उद्देश्य पर्यटक शहर सोनमर्ग को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करना है.

जेड-मोड़ टनल परियोजना के तहत, कुल 10.8 मीटर लंबाई वाली एक मुख्य टनल, कुल 7.5 मीटर लंबाई वाली संशोधित घोड़े के नाल के आकार वाली एस्केप टनल, कुल 8.3 मीटर लंबाई वाली डी-आकार वाली वेंटिलेशन टनल, कुल 110 मीटर व 270 मीटर लंबाई वाली दो बड़ी पुलिया और कुल 30 मीटर लंबाई वाली एक छोटी पुलिया का निर्माण किया गया है.
 

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