1990 आते आते कश्मीर में रालिव गालिव और चालिव का नारा गूंजने लगा. 19 जनवरी 1990 की रात कश्मीर में पंडितों का काल बनकर आई. मस्जिदों, लाउडस्पीकरों से ऐलान करा दिया गया, पंडितों को जान से मारने की धमकियां दी गईं. आतंकवाद और पाकिस्तान के हक में तकरीरें की गईं. भय से थर थर कांपते पंडित अपना सबकुछ छोड़ पलायन को मजबूर हो गए. कश्मीर ने 1947 की हिंसा, युद्ध और खराब माहौल देखा था लेकिन 80 के दशक में कट्टरपंथ घाटी में अपने जड़ें जमा रहा था. पाकिस्तान के बहकावे में आकर कश्मीर के युवा बंदूक उठा रहे थे. साल 89 का ढलान आया तो हिन्दुओं के खिलाफ नफरत में उफान आया. कश्मीरी हिन्दुओं और सिखों पर हमले बढ़ने लगे.