हर साल जम्मू के राजौरी और पुंछ जिले से हजारों की तादाद में खानाबदोश चरवाहे अपने माल मवेशी को चराने के लिए कश्मीर की चारागाहों का रुख करते हैं. भले ही परिवार एक दूसरे से कितने ही दूर क्यों न हों पर साल में ये एक उत्सव जरूर मानते हैं जहां पर आपस में मेल-मिलाप और गपशप होती है. लेकिन इस साल कोरोनावायरस और लॉकडाउन के चलते इन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. गुर्जर और बकरवाल क्यों और कैसे मनाते हैं ये खास सालाना उत्सव? जानने के लिए देखिए श्रीनगर से आजतक संवाददाता अशरफ वानी की ये रिपोर्ट.