झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. उन्होंने हाई कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है और वो बेगुनाह हैं.
हाई कोर्ट ने उनकी सारी दलीलों को खारिज कर दिया. बता दें कि बिरसा मुंडा जेल में बंद झारखंड के पूर्व सीएम को हाई कोर्ट से दोहरा झटका दिया है. अपनी गिरफ्तारी, समन और रिमांड को चुनौती देने वाली आपराधिक याचिका खारिज होने के बाद, सोरेन ने चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तीन दिनों की अंतरिम जमानत देने की मांग की थी.
जस्टिस मुखोपाध्याय की कोर्ट ने उन्हें सिर्फ अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत देते हुए तीन दिनों की जमानत देने से इनकार कर दिया. हेमंत सोरेन ने राजा राम सोरेन यानी अपने चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शनिवार, रविवार और सोमवार के लिए अंतरिम जमानत याचिका दायर की थी.
राजा राम सोरेन का 30 अप्रैल को निधन हो गया था. हालांकि चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होने की सोरेन की याचिका पर कोर्ट ने विचार किया था. कोर्ट ने उन्हें इस शर्त के साथ पॉलिसी कस्टडी में अंतिम संस्कार में शामिल होने का निर्देश दिया है कि वह मीडिया से बात नहीं करेंगे.
वहीं हेमंत सोरेन की याचिका रद्द होने के बाद बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि यह एक सबक है. उच्च पद पर बैठे भ्रष्टाचार करने वालों के लिए आप कितने भी महंगे वकील क्यों ना रख लें कानून के हाथ अंतत: आप तक पहुंच ही जाते हैं.