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झारखंड: वैक्सीनेशन की स्पीड स्लो, BJP ने लगाया हेमंत सोरेन सरकार पर लापरवाही का आरोप

BJP का आरोप है कि डबल डोज के मामले में सबसे निचले स्तर पर है. झारखंड में अब तक मात्र 22 फीसदी डबल व 66 फीसदी सिंगल डोज दिया जा पाया है. इसी प्रकार कांग्रेस और इसके गठबंधन प्रदेशों की स्थिति बद से बदतर है. पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की स्थिति कमोवेश ऐसी ही है. 

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BJP का कहना है कि हेमंत सरकार कोरोना जांच और वैक्सिनेसन अभियान सुस्तचाल में चल रही है.
BJP का कहना है कि हेमंत सरकार कोरोना जांच और वैक्सिनेसन अभियान सुस्तचाल में चल रही है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टीकाकरण ही सभी वैरिएंट से बचाव का कारगर उपाय: दीपक प्रकाश
  • गैरभाजपा शासित राज्य में टीकाकरण धीमा: BJP प्रदेश अध्यक्ष झारखंड

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने हेमंत सरकार पर कोरोना सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा है कि हेमंत सरकार की विफलता है कि देश में टीकाकरण सबसे निचले स्तर पर झारखंड में है. बीजेपी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना के नए वेरियंट ओमिक्रॉन को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है, यह पूरे दुनिया में तेजी से फैल सकता है. बावजूद हेमंत सरकार कोरोना जांच व वैक्सिनेशन अभियान सुस्तचाल में चल रही है..

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उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बाद से केंद्र सरकार अलर्ट पर है. लेकिन झारखंड सरकार कितनी लापरवाह है, उसका उदहारण और बानगी जीनोम सैंपलिंग मशीन का राज्य में नहीं होना है. कोरोना के वैरिएंट का पता करने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन आवश्यक है.

6 माह से रिम्स में अटकी है फाइल 

मशीन खरीदने से संबंधित फाइल 6 माह से रिम्स में अटकी हुई है. इस कारण वायरस के नए वैरिएंट का पता करने के लिए पुणे पर निर्भर रहना पड़ेगा. जब तक वहां से कोरोना मरीज के वैरिएंट का पता चलेगा, तब तक नया वैरिएंट झारखंड को अपनी चपेट में ले सकता है. झारखंड सरकार और रिम्स प्रबंधन को कुंभकर्णी नींद से जाग जानी चाहिए.

टीकाकरण सबसे निचले स्तर पर, अभियान तेज करने की मांग 

उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव में वैक्सीन ही सर्वोत्तम उपाय है. इसे देखते हुए भाजपा और इसके गठबंधन प्रदेशों में 60 से 90 फीसदी तक डबल डोज व सिंगल डोज 80 से 100 फीसदी वैक्सीन हो चुका है. जबकि झारखंड डबल डोज के मामले में सबसे निचले स्तर पर है. झारखंड में अब तक मात्र 22 फीसदी डबल व 66 फीसदी सिंगल डोज दिया जा पाया है. उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कांग्रेस और इसके गठबंधन प्रदेशों की स्थिति बद से बदतर है. पंजाब, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की स्थिति कमोवेश ऐसी ही है. 

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