(Chandrayaan-3 Successful Landing) चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है. पूरा देश इस समय खुशियों के माहौल में डूबा हुआ है. ISRO के इस सफल मिशन में भारत के युवा वैज्ञानिक आयुष झा का भी अहम रोल रहा है. पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर शहर के रहने वाले आयुष मिशन चंद्रयान-3 में बतौर इसरो वैज्ञानिक के तौर पर काम कर रहे हैं. Chandrayaan-3 की सफल लैंडिंग के बाद चक्रधरपुर चाईबासा समेत पूरे पश्चिम सिंहभूम जिले में लोग गर्व महसूस कर रहे हैं. आयुष ने इसी जिले से अपनी माध्यमिक शिक्षा हासिल की.
आयुष झा ने पश्चिमी सिंहभूम के जवाहर नवोदय विद्यालय से दसवीं करने के बाद डीएवी बिष्टुपुर से 12वीं पूरी की. जेईई में सफल होने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम से ग्रेजुएशन किया.
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम से ग्रेजुएशन की
बता दें की इसरो वैज्ञानिक आयुष झा के पिता ललन कुमार झा चक्रधरपुर में प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थे. मां विनीता झा हाउस वाइफ हैं. आयुष झा ने पश्चिमी सिंहभूम के जवाहर नवोदय विद्यालय से दसवीं करने के बाद डीएवी बिष्टुपुर से 12वीं पूरी की. जेईई में सफल होने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम से ग्रेजुएशन की.
चंद्रयान-3 के लैंडिंग मैनेजमेंट सिस्टम में जमशेदपुर का पूर्व छात्र
फिर 2016 में इसरो के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर अहमदाबाद में एक वैज्ञानिक के तौर पर योगदान दिया. पहले बड़े प्रोजेक्ट की बात करें तो चंद्रयान-2 के रडार के विकास पर आयुष ने काम किया. अब चंद्रयान-3 के रडार विकास के साथ उसकी लैंडिंग और रियूजेबल लॉन्च व्हीकल मिशन पर काम किया. इस समय आयुष अभी बेंगलुरु में हैं, जहां सेटेलाइट लॉन्च होने के बाद सारा ऑपरेशन होता है.
आयुष चंद्रयान-3 की लैंडिंग ऑपरेशन के लिए पिछले महीने से बेंगलुरु में हैं. उनकी पूरी टीम ने बेंगलुरु में चंद्रायन-3 की सफल लैंडिंग के लिए दिन-रात मेहनत की. बता दें चंद्रयान प्रक्षेपण के बाद सारा काम बेंगलुरु के इसरो टेलेमेट्री, ट्रेकिंग एंड कमांड नेटवर्क में होता है, जहां से जितने भी सेटेलाइट या चंद्रयान-मंगलयान आदी लॉन्च होते हैं उसकी ट्रैकिंग व लैंडिंग की मॉनिटरिंग यहीं से की जाती है.
(इनपुट- जय कुमार तांती)