केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का असर मनरेगा स्किम पर भी दिखाई देने लगा है. एक अनुमानके मुताबिक देशभर में मनरेगा के तहत काम करनेवालों में 20 से 25 फीसदी तक की कमी आई है. झारखंड में इसका खासा असर देखने को मिल रहा है. मनरेगा आयुक्त के मुताबिक राज्य में पंजीकृत 26 लाख मनरेगा मजदूरो में से करीब एक लाख फिलहाल काम पर है और धीरे-धीरे इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है.
झारखंड पर असर ज्यादा
नोटबंदी ने झारखंड में चल रहे मनरेगा के कामों पर असर डाला है फिलहाल मनरेगा के मजदूर काम के आभाव में दूसरा काम कर रहे है. खूंटी जिले के कालीमाटी गांव के मनरेगा मजदूर जगन्नाथ उरांव फिलहाल
कुली का काम कर रहे है, वहीं मनरेगा मजदूर शंकर उरांव बताते है कि मनरेगा में काम नहीं मिलने की वजह से वे खेतों में काम कर रहे है.
सरकारी आंकड़ो की माने तो राज्य में पंजीकृत 26 लाख मनरेगा मजदूरों में से सिर्फ एक लाख पांच हजार ही अभी काम पर है. मनरेगा में कम मजदूरो की मुख्य वजह नवम्बर/दिसंबर के महीने में फसलों की कटाई-बुवाई को माना जा रहा है. दरअसल ग्रामीण इलाकों में लोग इनदिनों अपने खेतों में व्यस्त रहते है वहीं अच्छे मानसून की वजह से खेती भी काफी अच्छी हुई है.