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बालासोर हादसे ने छीने दो जवान बेटे और दामाद... 70 साल के बुजुर्ग के घर में अब कोई कमाने वाला नहीं

बालासोर रेल हादसे में दुमका के एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई. 70 साल के सोनवा मरांडी के दो बेटे और एक दामाद भी 2 जून को उसी कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार थे, जिसका एक्सीडेंट हो गया. तीनों मजदूरी करने के लिए निकले थे. लेकिन कभी वापस लौटकर न आ सके.

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परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है.
परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है.

बालासोर ट्रेन हादसे से जहां पूरा देश दुखी हुआ है. तो वहीं, न जाने कितने ही ऐसे लोग हैं जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खो दिया है. ऐसा ही एक परिवार है झारखंड के दुमका का. यहां रहने वाले वृद्ध सोनवा मरांडी का तो इस रेल हादसे में मानो सब कुछ ही छिन गया गया. दरअसल, दर्दनाक ट्रेन एक्सीडेंट में उनके दो जवान बेटों सहित दामाद की मौत हो गई है.

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सोनवा के दोनों बेटे ही घर में कमाने वाले थे. मजदूरी करके वो जो भी पैसा कमाते थे, उसे घर भेजते थे. उन्ही रुपयों से घर चलता था. लेकिन अब जब वही दोनों इस दुनिया में नहीं रहे तो अब घर का गुजारा कैसे होगा. बुजुर्ग सोनवा खुद 70 साल के हैं. ऐसे में वो क्या ही काम कर सकते हैं जिससे घर के लिए दो पैसे आ जाएं. इसका जवाब तो खुद सोनवा के पास भी नहीं है.

फिलहाल सोनवा बेटों की लाश की शिनाख्त के लिए भुवनेश्वर गए हुए हैं. जबकि, उनके दामाद का शव परिजनों को सौंप दिया गया है. दरअसल, दुमका जिले के कई बेरोजगार युवा मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं. ताकि वे चार पैसे कमा सकें और घर वालों का पालन-पोषण कर सकें.

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इसी तरह जरमुंडी प्रखंड के राजा सिमरिया पंचायत के मठकारा गांव के रहने वाले सोनवा मरांडी के दोनों बेटे और दामाद भी 2 जून को घर से निकले. ताकि दिन भर मजदूरी करके पैसे कमाकर घर लाएंगे और घर वाले उन रुपयों से दो वक्त की रोटी खा पाएंगे. लेकिन तीनों घर से ऐसे निकले कि कभी वापस ही नहीं आए.

बालासोर रेल हादसे में सोनवा मरांडी के दोनों बेटे देवेश्वर मरांडी और मेरुलाल मरांडी एवं उनका दामाद नाइकी टुडू की मौत हो गई. परिवार वालों को जैसे ही इसकी सूचना मिली, घर में मातम छा गया. सोनवा के दोनों बेटों के दो बेटे भी हैं. घर में सभी का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार को यकीन ही नहीं हो पा रहा है कि अब घर के तीन सदस्य इस दुनिया में नहीं रहे हैं.

झारखंड सरकार ने अब तक नहीं किया मुआवजे का ऐलान
एक तो परिवार को अपनों के जाने का दुख और दूसरा भविष्य कि चिंता खाये जा रही है की अब परिवार का आगे क्या होगा? लेकिन वहीं, अब तक झारखंड सरकार ने इस परिवार की सुध नहीं ली है. न ही किसी तरह के मुआवजे की घोषणा की गई है.

कब और कैसे हुआ था ओडिशा रेल हादसा?
बता दें, 2 जून को ट्रेन नंबर 12481 कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानगा बाजार स्टेशन के (शालीमार-मद्रास) मेन लाइन से गुजर रही थी, उसी वक्त डिरेल होकर वो अप लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई. ट्रेन पूरी रफ्तार (फुल स्पीड) में थी, इसका परिणाम यह हुआ कि 21 कोच पटरी से उतर गए और 3 कोच डाउन लाइन पर चले गए.

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दरअसल, बहानगा बाजार स्टेशन पर इन ट्रेन का स्टॉपेज नहीं है. ऐसे में दोनों ही ट्रेनों की रफ्तार तेज थी. बहानगा बाजार स्टेशन से गुजर रही कोरोमंडल एक्सप्रेस अचानक पटरी से उतरी तो ट्रेन के कुछ डिब्बे मालगाड़ी से जा भिड़े. इसी दौरान हादसे के समय डाउन लाइन से गुजर रही यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के पीछे के दो डिब्बे भी पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस की चपेट में आ गए.

हादसा भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से करीब 171 किलोमीटर और खड़गपुर रेलवे स्टेशन से करीब 166 किलोमीटर दूर स्थित बालासोर जिले के बहानगा बाजार स्टेशन पर हुआ. बता दें, इस रेल हादसे में 288 लोगों की मौत हुई है. वहीं कई अन्य घायल हुए हैं.

(इनपुट: मृत्युंजय पांडे)

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