scorecardresearch
 

सीता सोरेन को परिवार से बगावत और BJP के साथ का नहीं मिला फायदा, दुमका में लौटा JMM का रुतबा

झारखंड का दुमका लोकसभा क्षेत्र इस बार चर्चित हॉट सीटों में एक रहा. यहां से जेएमएम के संस्थापक शिबू सोरेन की बहू परिवार के खिलाफ जाकर बीजेपी की प्रत्याशी बनी. फिर भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा और यहां शिबू सोरेन के खासम खास माने जाने वाले नलिन सोरेन ने जीत दर्ज की. दुमका से ऐसा पहली बार हुआ जब सोरेन परिवार से बाहर का कोई सदस्य दुमका से जेएमएम का प्रत्याशी बना.

Advertisement
X
सीता सोरेन हारी
सीता सोरेन हारी

दुमका लोकसभा क्षेत्र झारखंड का महत्वपूर्ण सीट माना जाता रहा है. इसे जेएमए का गढ़ माना जाता है. यहीं कारण है कि झारखंड की सत्ताधारी दल जेएमएम के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिष्ठा यहां दांव पर लगी थी. क्योंकि यहां से एक तरफ जहां खुद शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन बीजेपी के प्रत्याशी के रूप में परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल रखी थी. सीता सोरेन को परिवार से बगावत कर बीजेपी में जाने का कोई फायदा नहीं हुआ. माना जा रहा था कि सोरेन परिवार के झगड़े नतीजा प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. 

Advertisement

वहीं दूसरी तरफ पहली बार ऐसा हुआ है कि जेएमएम ने सोरेन परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को दुमका में प्रत्याशी बनाया. जेएमएम ने इस बार नलिन सोरेन को प्रत्याशी बनाया था. नलिन ने सीता सोरेन को कड़ी टक्कर दी और पाला अपने पक्ष में कर लिया.  परिवार से बागी हुई शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने ही जेएमएम को चुनौती दे रखी थी. सीता की नाराजगी की वजह से पारिवारिक झगड़ा जगजाहिर हो गया था. इसके बावजूद सीता सोरेन को परिवार से बगावत का कोई फायदा नहीं हुआ.

बीजेपी में जाने का भी नहीं मिला फायदा
दुमका में 2019 लोकसभा चुनाव में  बीजेपी के सुनील सोरेन ने जीत हासिल की थी. ऐसे में माना जा रहा था कि सोरेन परिवार की बहु होने और बीजेपी का साथ मिलने का फायदा निश्चित रूप से सीता सोरेन को मिलेगा और सोरेन फैमिली के अंदर की लड़ाई काफी हद तक नतीजों को प्रभावित कर सकती है. लेकिन सारे कयासों और अंदाजों पर पानी फिर गया. शिबू सोरेन के परिवार में सियासी दरार तब पैदा हुई, जब ED ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया और मुख्यमंत्री के नाम पर सीता सोरेने के बदले हेमंत की पत्नी कल्पना के नाम की चर्चा होने लगी.

Advertisement

इस वजह से जेएमएम से अलग हुई सीता सोरेन
हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद सीएम के रूप में कल्पना सोरेन का नाम सामने आने पर सीता सोरेन ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी और बड़ी बहू होने के नाते इस पद के लिए खुद को दावेदार बताया. तब ऐसा विवाद सामने आने पर चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया और हेमंत के छोटे भाई बसंत सोरेन को कैबिनेट में जगह दी गई. वहीं सीता सोरेन को कुछ नहीं मिला. इसके बाद सीता सोरेन ने खुलकार परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जेएमएम से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो गई.

पहली बार जेएमएम ने सोरेन फैमिली से बाहर के सदस्य को बनाया प्रत्याशी
दुमका से जेएमएम के संस्थापक शिबू सोरेन 8 बार सांसद रहे हैं. यहां से हर बार जेएमएम की ओर से सोरेन परिवार का ही कोई सदस्य प्रत्याशी रहता है. इस बार भी परिवार की बड़ी बहू शिबू सोरने के बड़े बेटा स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन चुनाव लड़ी, लेकिन वह बीजेपी की उम्मीदवार थी. वहीं दूसरी तरफ जेएमएम ने नलिन सोरेन को मैदान में उतारा.

Live TV

Advertisement
Advertisement