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रिपोर्ट का खुलासा, झारखंड में घट नहीं बढ़ रहे हैं जंगल

कभी झाड़-जंगल के मामले में झारखंड तमाम अन्य राज्यों से संपन्न माना जाता था. लेकिन बीते कुछ दशकों से वन क्षेत्रों में लगातार कमी आ रही थी. अब स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि झारखंड गठन यानी साल 2000-01 से अब तक राज्य में 947 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है.

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बढ़ रहा है जंगल का दायरा
बढ़ रहा है जंगल का दायरा

देश में वनों को बचाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. लेकिन इस दिशा में प्रयासों के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है. अन्य राज्यों में जहां वन क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है वहीं झारखंड में इसकी बढ़ोतरी देखी जा रही है. लेकिन एक बात यह भी है कि यहां सघन वन क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है.

वनों की सघनता के लिए मशहूर झारखंड

कभी झाड़-जंगल के मामले में झारखंड तमाम अन्य राज्यों से संपन्न माना जाता था. लेकिन बीते कुछ दशकों से वन क्षेत्रों में लगातार कमी आ रही थी. अब स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि झारखंड गठन यानी साल 2000-01 से अब तक राज्य में 947 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2001 से 2015 के बीच झारखंड का वन क्षेत्र 22,531 वर्ग किमी से बढ़कर 23,478 वर्ग किमी हो गया है. हालांकि वन क्षेत्र बढ़ने के बावजूद जंगलों के अत्यंत सघन वन क्षेत्र में गिरावट भी आई है. वन विभाग की रिपोर्ट में भी सघनता में कमी की बात कही गई है.

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दरअसल, वन विभाग की खुद की रिपोर्ट बताती है कि ऐसा वन क्षेत्र जिसका घनत्व 70 फीसदी से अधिक माना जाता है महज 2,588 वर्ग किमी है. जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का महज 3.25 प्रतिशत है. इसकी वजह पश्चिम सिंहभूम के सारंडा समेत तमाम अन्य क्षेत्रों में खनिजों के दोहन के कारण हुई वनों की कटाई को माना जा रहा है. झारखंड में घने जंगलों में कमी आने का दुष्परिणाम भूमि के कटाव के रूप में भी सामने आ रहा है. वन और वनस्पतियों के नष्ट होने से वर्ष 2003-05 के दौरान 16.40 फीसदी नये भू-भाग कटाव के दायरे में पाए गए.

 

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