झारखंड के खूंटी जिले में यौन शोषण के आरोपी आईएएस अधिकारी सैयद रियाज अहमद के कोर्ट में न पहुंचने पर मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यपाल की अदालत ने नाराजगी जताई है. जज ने खूंटी थाना प्रभारी से जवाब मांगा है. कोर्ट ने सवाल किया कि आरोपी के खिलाफ जारी समन का तामील कराकर प्रतिवेदन न्यायालय में क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया.
कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन न करने के लिए क्यों न थाना प्रभारी का वेतन रोक दिया जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने थाना प्रभारी को आठ सितंबर तक जवाब देना का आदेश दिया है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर वेतन पर रोक लगाने की बात कही.
मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने समन जारी करते हुए कहा कि सैयद रियाज अहमद को पेश करने के लिए 20 अप्रैल को समन जारी किया गया था. इसे तामील कराकर आज तक कोर्ट में पेश नहीं किया गया. बताएं कि ऐसा क्यों हुआ. यह क्यों न समझा जाए कि आप या तो आरोपी के साथ मिले हुए हैं या अक्षम पुलिस अधिकारी हैं. ऐसी स्थिति में वेतन बंद करने का आदेश क्यों न पारित किया जाए.
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि संबंधित थानेदार इसका जवाब आठ सितंबर तक न्यायालय में पेश करें. अगर कोई उत्तर नहीं दिया तो समझा जाएगा कि आपको अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है और आदेश पारित कर दिया जाएगा. इसके साथ एक बार फिर समन की प्रति तामील के लिए भेजी जा रही है.
मामला दरअसल जुलाई 2022 का है. एसडीएम रियाज अहमद पर आईआईटी की एक छात्रा जो इंटर्नशिप करने खूंटी आई थी, उसने सेक्सुअल हररस्मनेट का केस दर्ज करवाया था. उसके बाद एसडीएम को हिरासत में ले लिया गया था और सस्पेंड भी किया गया था. एसडीएम पर आरोप है कि उसने एक डिनर पार्टी होस्ट की थी. इसमें शराब भी सर्व की गई. पीड़िता का आरोप है कि पार्टी के बाद उसके साथ एसडीएम ने सेक्सुअल हैरेसमेंट किया.