झारखंड सरकार इन दिनों विश्व आदिवासी दिवस को लेकर जश्न मना रही है. रांची में बुधवार को पारंपरिक वेषभूषा में झारखंड के आदिवासी नेताओं ने एकजुट होकर एक शोभायात्रा निकाली. इस शोभायात्रा का उद्देश्य लोगों को आदिवासी एकता का संदेश देना था.
आदिवासियों के लिए नई योजनाओं की घोषणा
साथ ही इस मौके पर नेताओं ने आदिवासी मूल्यों और आदिवासियों के अस्तित्व को बचाए रखने का भी संकल्प लिया. इस सिलसिले में रांची में कई सरकारी कार्यक्रम
आयोजित किए गए. हर बार की तरह इस बार भी आदिवासियों के उत्थान और विकास के लिए कई घोषणाएं भी की गई. इस मौके पर आज झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री
अर्जुन मुंडा और उनकी पत्नी मीरा मुंडा पारंपरिक लिबास में दिखे.
'आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में'
वहीं यहां मौजूद नेता विपक्ष हेमंत सोरेन ने इशारो-इशारो में CNT और SPT एक्ट में बदलाव को लेकर राज्य के बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि
आदिवासियत खतरे में है. इनका अस्तित्व खतरे में है. इसलिए सभी को एकजुट होकर अपने आप को बचाना होगा.
अभी भी हाशिये पर है आदिवासी
वैसे आदिवासी बहुल इस झारखंड राज्य में आदिवासियों के उत्थान और विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए. लेकिन राज्य आदिवासियों की हकिकत इससे परे है. बीते
सोलह सालों में यहां विकास और आदिवासियों के उत्थान के नाम पर आदिवासियों के तथाकतिथ पैरोकारों ने केवल अपनी झोलियां भरी. हकीकत यह है कि इन सोलह
सालों में अधिकतर समय आदिवासी ही सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर काबिज रहे लेकिन इसके बावजूद आदिवासी आज भी बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर है.
ढाई साल में 1200 महिलाओं की हत्या
गौरतलब है की झारखंड में बीते ढाई सालों में डायन बताकर करीब 1200 महिलाओं की हत्या की जा चुकी है. इसी तरह आदिवासियों के ट्रैफिकिंग के आंकड़ें भी चौकाने
वाले हैं. हर साल 30 हजार आदिवासी लड़कियां तस्करी का शिकार हो रही हैं.
खर्च नहीं हुए 2530 करोड़ रुपये
झारखंड कल्याण विभाग ने झारखंड के आदिवासी पिछड़े वर्गों के कल्याण योजनाओं के आकर में हर साल बढ़ोतरी करता है. साथ ही अनुपूरक बजट के सहारे भी राशि का
प्रावधान करती रही है लेकिन विभाग मूल बजट की राशि भी खर्च नही कर पाता.