झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने पहुंचे थे. इस बैठक में उनके साथ राज्य की अन्य पार्टियां भी मौजूद थी. सोरेन, सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे. सभी ने गृह मंत्री अमित शाह के साथ जातीय जनगणना की मांग को लेकर मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने इस बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कोर्ट में जो कुछ कहा गया वह पूरी तरह अलग मामला है. मैं अब भी कहूंगा कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए. हमने इस बैठक में नक्सली गतिविधियों को जड़ से खत्म करने की बात भी कही. हालांकि इस बैठक में उन्होंने सरना/आदिवासी धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने को लेकर कोई मांग नहीं उठाई. वह सिर्फ जातीय जनगणना के मुद्दे पर डटे रहे.
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM की अध्यक्षता में झारखण्ड से सर्वदलीय शिष्टमंडल ने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें जाति आधारित जनगणना कराने हेतु माँग पत्र सौंपा। pic.twitter.com/RoVEAFjH8V
— Office of Chief Minister, Jharkhand (@JharkhandCMO) September 26, 2021
हेमंत सोरेन इससे पहले आदिवासी समाज को हिंदू धर्म से अलग बताते रहे हैं. सोरेन सरकार ने विधानसभा में 'सरना आदिवासी धर्म कोड बिल' सर्वसम्मति से पास कर केंद्र सरकार को भेजा था. झारखंड सरकार ने कहा था कि इसके जरिए आदिवासियों की संस्कृति और धार्मिक आजादी की रक्षा की जा सकेगी. लेकिन, केंद्र सरकार ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है.
झारखंड दिशोम पार्टी के प्रमुख सालखन सोरेन का कहना है कि साल 2021 में होने वाली जनगणना में सरना धर्म कोड को लागू किया जाए. इससे झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के आदिवासियों को एक अलग धर्म की पहचान मिल पाएगी. झारखंड के सरना आदिवासी इस मांग को लेकर सालों से संघर्ष कर रहे हैं.
और पढ़ें- झारखंड में नहीं थम रहा भाषा विवाद, अब सोरेन बोले- बाहरियों को नौकरी मिली
वो मांग कर रहे हैं कि जनगणना में उनके आगे हिंदू न लिखा जाए. हिंदू धर्म से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनका धर्म सरना है. इस समुदाय के लोग छोटानागपुर क्षेत्र में रहते हैं. हेमंत सोरेन खुद सरना समुदाय से आते हैं.
सरना धर्म क्या है?
झारखंड, बंगाल, ओडिशा और बिहार में आदिवासी समुदाय का बड़ा तबका अपने आपको सरना धर्म के अनुयायी के तौर पर मानता है. वो प्रकृति की प्रार्थना करते हैं और उनका विश्वास 'जल, जंगल, ज़मीन' है. ये वन क्षेत्रों की रक्षा करने में विश्वास करते हुए पेड़ों और पहाड़ियों की प्रार्थना करते हैं, झारखंड में 32 जनजातीय समूह हैं, जिनमें से आठ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों से हैं. इनमें से कुछ समुदाय हिंदू धर्म का पालन करते हैं, कुछ ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए हैं. माना जाता है कि आदिवासी समुदाय के ईसाई समुदाय में परिवर्तित होने के बाद वो एसटी आरक्षण से वंचित हो जाते हैं. ऐसे में वो सरना धर्म की मांग करके अपने आपको आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं होने देना चाहते हैं.