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कोरोना: झारखंड के अस्पतालों में बिस्तर नहीं, श्मशान में जगह नहीं, हर जगह वेटिंग

पिछले एक सप्ताह की बात करें तो झारखंड में रोजाना डेढ़ से लेकर दो हजार की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं. कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा सामने आ रही है कि राज्य के सभी अस्पतालों के बिस्तर फुल हो गए हैं.

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झारखंड में कोरोना से हालत गंभीर
झारखंड में कोरोना से हालत गंभीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अस्पतालों से लेकर श्मशान तक वेटिंग ही वेटिंग
  • अस्पतालों में बिस्तरों की भारी समस्या
  • इलेक्ट्रिक शवदाह गृह से भी शवों को लौटाया जा रहा

देश के अन्य राज्यों के साथ ही झारखंड में भी कोरोना की दूसरी लहर भयावह हो गई है. कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि अस्पताल से लेकर श्मशान तक वेटिंग ही वेटिंग देखने को मिल रही है. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स से लेकर राजधानी के सभी निजी अस्पतालों में बिस्तर फुल हो गए हैं. शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीजों का मिलना बदस्तूर जारी है. पिछले एक सप्ताह की बात करें तो झारखंड में रोजाना डेढ़ से लेकर दो हजार की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं.

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इस खतरनाक बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले दो दिनों में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 34 कोविड-19 मरीज़ों की मौत हुई है. कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा सामने आ रही है कि राज्य के सभी अस्पतालों के बिस्तर फुल हो गए हैं. अस्पतालों में जगह नहीं मिलने की वजह से कई मरीजों की जान जा रही है. एक तरफ जहां कोरोना अपना विकराल रूप लेता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है लोगों के सामने समस्या ज्यादा है और सुविधाएं कम हैं.

 पैरवी के लिए सीएम से लेकर अधिकारियों तक लोग लगा रहे हैं दौड़

एसिंप्टोमेटिक और माइल्ड सिंप्टोमेटिक मरीजों का इलाज तो घर पर हो रहा है लेकिन जिन मरीज़ो की स्थिति नाजुक हैं उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है, अस्पतालों में बिस्तर ही नहीं बचे. रिम्स के अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप, राज हॉस्पिटल के जनरल मैनेजर मनीष ने साफ कह दिया कि उनके यहां मरीजों के लिए बेड उपलब्ध नहीं है. लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि इन मरीजों को आगे लेकर जाएं तो कहां जाएं. घर पर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा इतनी आसान भी नहीं है.

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 अस्पताल से लेकर श्मशान तक वेटिंग ही वेटिंग

पैरवी के बाद भी लोगों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहा है दूसरी ओर दुर्भाग्यवश अगर किसी की मौत हो जाती है तो दाह संस्कार के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. श्मशान से लेकर कब्रिस्तान तक अंतिम संस्कार के लिए लोगों को लाइन लगानी पड़ रही है. दरअसल इस खतरनाक बीमारी से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में परिजनों को दाह संस्कार के साथ-साथ सामाजिक उपेक्षाएं भी झेलनी पड़ रही हैं.

इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में भी वेटिंग

राजधानी के एकमात्र इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में भी वेटिंग ही वेटिंग है. रविवार की देर शाम तक 11 शवों को घंटों इंतजार करना पड़ा. शवदाह गृह के बर्नर में आई खराबी की वजह से 11 शवों को वापस लौटा दिया गया. उनके परिजनों को कहा गया है कि आज का संस्कार नहीं हो पाएगा, इसलिए वे लोग अपने परिजन के शव को वापस ले जाएं. परिजनों के सामने समस्या यह है कि बड़ी मुश्किल से एंबुलेंस लेकर वह शवदाह गृह पहुंचे थे और अब वापस अस्पताल के मोर्चरी में शवों को रखना एक बड़ा कठिन काम है. एंबुलेंस में शव ढोने वाले ड्राइवर के सामने एक बड़ी समस्या यह है कि वह ज्यादा देर तक पीटीईं कीट पहन कर रह नहीं सकते. ऐसे में घंटों इंतजार करना उनके लिए बहुत बड़ी परेशानी का सबब बन गया है. 

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रांची डीसी छवि रंजन का बयान
रांची डीसी ने कहा है कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार शवों को जलाने के लिए हरमू मुक्तिधाम स्थित शवदाह गृह का उपयोग किया जा रहा है, इसमें तकनीकी खराबी आने के कारण शवों को जलाने में परेशानी आ रही है रांची नगर निगम इसका संचालन करता है इसलिए जल्द से जल्द ठीक कराने के लिए कहा गया है.

 

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