
झारखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने अपने बयान पर खेद जताया है. डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें अपने उस बयान पर अफसोस है जिससे चिकित्सा जगत के लोग आहत हुए और उसे अपमानजनक करार दिया. राज्य के स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उनका इरादा डॉक्टरों की भावनाओं को आहत करना नहीं था.
असल में, नए नियुक्त डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के एक समारोह के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने एक उदाहरण दिया था, और कहा था, ''आधे डॉक्टर पैसा कमाने के लिए डॉक्टर बनते हैं और आधे लोग मोटा दहेज लेने के लिए डॉक्टर बनते हैं.'' इस बयान के कारण झारखंड के डॉक्टरों में भारी आक्रोश है. स्वास्थ्य सचिव ने कहा था कि डॉक्टरों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती है कि वे यहां धन हासिल करने के लिए आये हैं या उन्हें खूब दहेज मिलेगा. उन्हें मौके पर खड़ा होना पड़ता है और सभी की उम्मीदों पर खरा उतरना पड़ता है.
इस संबंध में NRHM ने बयान जारी किया जिसमें स्वास्थ्य सचिव ने खेद जताया है. स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उनके बयान की IMA ने गलत व्याख्या की. स्वास्थ्य सचिव ने 30 दिसंबर 2020 को बयान दिया था, लेकिन इसे लेकर कंट्राडिक्शन एक जनवरी को प्रकाशित हुआ था.
स्वास्थ्य सचिव कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें जब आईएमए से पत्र मिला और डॉक्टरों ने उनके बयान पर अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया, तो उन्होंने सोचा कि इस गतिरोध को तोड़ना चाहिए. लिहाजा, बयान जारी करना पड़ा है.

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वहीं आईएमए के राज्य सचिव डॉ. प्रदीप सिंह ने स्वास्थ्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी के रुख का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि हम जटिल हालात में योगदान देने में हमेशा आगे रहे हैं. कोरोना महामारी के दौरान 16 डॉक्टरों के जान गंवाने के बावजूद हमने अपनी सेवा जारी रखी. लिखित रूप से खेद प्रकट किए जाने के बाद आईएमए ने स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को रद्द करने का फैसला किया है.