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झारखंड सरकार के अधिकारियों को पसंद नहीं अंगूठा लगाना

झारखंड में अधिकारी बायोमीट्रिक अटेंडेंस में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. वे सरकार के निर्देश को खुला उल्लंघन कर रहे हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

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झारखंड में अधिकारी सरकार के निर्देश का खुला उल्लंघन कर रहे हैं. अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्य संस्कृति में सुधार लाने और पारदर्शिता के लिए सरकार ने शीर्ष स्तर के पदाधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक के कर्मियों के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस बनाने का सख्त निर्देश दे रखा है. लेकिन इसका अनुपालन शीर्ष पर बैठे बहुत कम अधिकारी कर रहे हैं.

झारखंड मंत्रालय में काम कर रहे अखिल भारतीय सेवा के 13 अधिकारियों ने अगस्त महीने में अबतक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है. जबकि वे हर दिन मंत्रालय आते हैं. एक अधिकारी ने सिर्फ एक दिन तो अन्य बड़े अधिकारियों में एक ने 9, दूसरे ने 10 तथा तीसरे ने 14 दिन उपस्थिति दर्ज कराई है.

वहीं अगर इसकी तुलना राज्य सेवा के अधिकारीयों से की जाए तो मामला एकदम उलट नजर आता है. बायोमीट्रिक पद्धति से उपस्थिति दर्ज कराने के मामले में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर अव्वल हैं. औसतन 80-85 फीसदी अफसर इस पद्धति से अटेंडेंस बना रहें हैं. यहां एक दिलचस्प बात सामने आई है कि सीएमओ और सीएसओ में पदस्थापित इस सेवा के अफसर अटेंडेंस लगाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं.

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इन आंकड़ों के अध्ययन से एक बात और सामने आई कि बायोमीट्रिक अटेंडेंस मशीन लगने के बाद मंत्रालय में काम कर रहे 57 फीसदी कर्मचारी समय से पहले कार्यालय पहुंच रहे हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सख्त निर्देश दे रखा है कि जो अधिकारी बायोमीट्रिक अटेंडेंस का अनुपालन नहीं करते उनका वेतन काट लिया जाए.

उन्होंने उपस्थिति के बावजूद अटेंडेंस नहीं बनाने वाले कर्मियों को अनुपस्थित घोषित करने तक का आदेश दे रखा है. हालांकि शुरुआती दौर में वन और पुलिस जैसे कुछ विभागों के कर्मचारियों ने इस पद्धति का जमकर विरोध किया था, जो क्षेत्र भ्रमण के नाम पर कार्यालय से अक्सर गायब रहा करते थे. लेकिन सरकार के सख्त रुख की वजह से विरोध के स्वर दब गए. बहरहाल इन आंकड़ों से यह बात तो जरूर साबित होती है कि जहां इन नियमों का अनुपालन कर्मचारी और छोटे अधिकारी तो कर रहे हैं, वहीं बड़े अधिकारी इन नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं.

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