झारखंड में बीजेपी संथाल परगना में हुए डेमोग्राफी में चेंज को लेकर मुखर है. बांग्लादेशी घुसपैठ को बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाने के मूड में है. पार्टी इसे लेकर लगातार हमलावर है. मंगलवार को पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और कई विधानसभा क्षेत्रों में 123 फीसदी तक वोटर लिस्ट में वोटर कैसे बढ़े, इसकी जांच की मांग की.
मतदाताओं की बढ़ी हुई संख्या को लेकर सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद के नेतृत्व में मुलाकात की. उन्होंने सीईओ रवि कुमार से मुलाकात के बाद कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आप के पास पहुंचे हैं. उनका विषय था कि 2024 लोकसभा का चुनाव संपन्न हुआ, उसमें राज्य में अप्रत्याशि रूप से मतदाताओं की बढ़ी हुई संख्या दर्ज की गई.
भाजपा ने कहा कि मतदाता सूची में एक 123 फीसदी की वृद्धि हुई है. हमने दस विधानसभा के लोगों के साथ सर्वेक्षण किया. हमने पांच सौ पेज का दस्तावेज चुनाव आयोग को दिया है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झारखंड को दस्तावेज सौंपा गया है. उन्होंने भी इस पर चिंता व्यक्त किया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी.
डेमोग्राफिक चेंज को बड़ा मुद्दा बनाएगी BJP
बीजेपी ने पहले से ही साफ कर दिया है कि संथाल परगना में डेमोग्राफिक चेंज को विधानसभा चुनावों में पार्टी बड़ा मुद्दा बनाएगी. पार्टी के साहेबगंज से विधायक अनंत ओझा ने आरोप लगाया था कि सरकार के तुष्टिकरण नीति के कारण बंगाल से सटे तमाम जिलों का परिवेश बदल रहा है. सदन के अंदर और बाहर इस मुद्दा को उठाने के बाद भी इसकी अनदेखी सरकार लगातार कर रही है, सिर्फ वोटबैंक के राजनीति के कारण ऐसा हो रहा है.
घुसपैठ का आरोप
उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश से लगातार घुसपैठ हो रहा है. यहां के आदिवासियों से शादी की जाती है और फिर पैदा होने वाले बच्चे समेत जमीन पर बांग्लादेशी अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा कर लेते हैं. चुकी यहां आदिवासी जमीन ट्रांसफर नहीं हो सकती. अगर कोई आदिवासी महिला मुखिया बन गई तो भले ही उसका पति अल्पसंख्यक हो मुखिया पति अपने हिसाब से काम करता है और संसाधन को नियंत्रण में रखता है. यहां मुस्लिम आबादी 9 फीसदी से बढ़कर 22 फीसदी तक हो गई है, जबकि 1951 में आदिवासी जनसंख्या 44 फीसदी थी वो घटकर 26 फीसदी हो गई है, जो वाकई चिंताजनक है .
1990 के दशक का जिक्र
1990 के दशक में ऐसी गड़बड़ी पाए जाने पर एकसाथ 7 हजार मतदाता का नाम वोटरलिस्ट से हटाया गया था. लेकिन उनको डिपोट नहीं किया गया. विधायक ने कई प्रखंड का नाम गिनवाया, जहां 2014 से लेकर 2019 तक मतदाता वृद्धि का अनुपात समझ में आता है, लेकिन 2019 से 2024 का अनुपात नहीं समझ आता है.
दूसरी तरफ विधायक का आरोप है कि गैर अल्प संख्यक जनसंख्या और उनके नाम वोटरलिस्ट से गायब हैं. 20 अगस्त तक आखिरी वोटर पुनरीक्षण होना है, ऐसे में इन मुद्दों का ख्याल चुनाव आयोग को रखना चाहिए. झारखंड हाई कोर्ट ने भी संथाल परगना में स्थित जिला के आला अधिकारियों से डेमोग्राफी में आए बदलाव पर पूरा रिपोर्ट तलब किया है.
साहेबगंज से विधायक अनंत ओझा का कहना है कि विधानसभा के आखिरी सत्र में भी गैर सरकारी संकल्प पर बहस के दौरान उन्होने मांग की है कि NRC को अपडेट किया जाए और एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाकर जांच करवाई जाए की आखिर क्यों संथाल परगना के डेमोग्राफी में बदलाव देखा जा रहा है.
ओझा का सीधा आरोप है कि यहां बंग्लादेश से आए लोगों का फर्जी आधार और जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाता है. 2021 में ऐसे मामले में तत्कालीन साहेबगंज के जिला अधिकारी ने कार्रवाई भी की थी. तब साहेबगंज के राजमहल के नारायणपुर फेलू टोला में ये पाया गया था कि एक महिला ने 1994 से 2020 के बीच यानी 26 साल में 13 बच्चों को जन्म दिया था. यानी 13 बच्चों के जन्म का निबंधन 26 साल के एक महिला ने करवाया था. यानी फर्जी तरीके से जन्म का निबंधन. गड़बड़ी पाए जाने पर जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने पे रोक लगा दी गई थी.