प्रयागराज के संगम नोज पर मची भगदड़ में घाटशिला के मुसाबनी प्रखंड के शिवराज गुप्ता (58 वर्ष) की मौत हो गई. शिवराज गुप्ता 25 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में स्नान करने के लिए अपने साथियों के संग गए थे. इस दल में महिला पुरुष समेत कुल 16 सदस्य थे. इसमें उनके साथियों का परिवार भी शामिल था, जबकि शिवराज गुप्ता अकेले ही थे.
घटना की खबर उनकी पत्नी पूनम राज को बुधवार को दोपहर लगभग 1 बजे मिली. पूनम ने बताया कि मंगलवार रात लगभग 11 बजे पति से मोबाइल पर आखिरी बार बात हुई थी. उन्होंने फोन पर बताया था कि वहां बहुत जाम है, इसके चलते उन्हें संगम तक पहुंचने के लिए 21 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. जिसमें 20 किलोमीटर वे और उनके साथियों का जत्था चल चुका था.
पूनम ने कहा कि पति से बात करने के बाद वो सुकुन से सो गईं, लेकिन जब सुबह जागीं तो टीवी और मोबाइल के माध्यम से पता चला कि प्रयागराज के संगम में भगदड़ मच गई है. इससे दिल काफी बेचैन हुआ. पति को कई बार फोन लगाया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया.
इसके बाद पति शिवराज के साथियों को फोन लगाया, तो किसी ने फोन नहीं उठाया. दोपहर 1 बजे पता चला कि कुंभ की भगदड़ में उनका सुहाग उजड़ गया है. पूनम और उनकी भाभी मंजू ने बताया कि हम दोनों को भी शिवराज ने साथ चलने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने साथ जाने से मना कर दिया. शिवराज झारखंड स्टेट कॉपरेटिव बैंक में कार्यरत थे. उनके 2 बच्चे हैं. बेटी स्वर्णा दिल्ली में और बेटा शिवम बेंगलुरु में नौकरी करता है.
पूनम ने बताया कि उनके पति शिवराज गुप्ता जब संगम में स्नान करने के लिए देर रात पहुंचे, उसी दौरान भगदड़ मच गई. शिवराज के दाहिने हाथ को उनके दोस्त कमल मंडल और बाएं हाथ को राज श्रीवास्तव ने पकड़ रखा था. इसी दौरान भगदड़ में दोनों साथियों का हाथ छूट गया और वे शिवराज जमीन पर गिर गए. उनका दन घुटने लगा. शिवराज सांस की बीमारी से भी ग्रसित थे. इस भगदड़ में उनके साथियों का जत्था भी भटक गया.
(मृत्युंजय सिंह के इनपुट्स के साथ)