
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव भले ही बीमार हों, लेकिन रिम्स का पेइंग वार्ड मालामाल हो रहा है. रांची में रिम्स के मल्टी स्पेशियलिटी पेइंग वार्ड में इलाज करा रहे चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से रिम्स प्रबंधन ने अब तक लगभग 7 लाख रुपये कमाए हैं.
लालू यादव लगभग 2 साल से पेइंग वार्ड में रह रहे हैं. हालांकि उन्होंने कितने पैसे रिम्स में जमा कराये हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गयी है. रिम्स के अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि पेइंग वार्ड की सुविधा लेने के लिए रिम्स प्रबंधन इसके लिए लालू यादव से एक हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराया वसूलता है. आरजेडी सुप्रीमो एकमात्र ऐसे मरीज हैं जो पिछले लगभग दो साल से यहां अपना इलाज करा रहे हैं. इनके अलावा 100 बेड के इस वार्ड में सिर्फ गिने-चुने मरीज भर्ती हैं.
दरअसल, रिंग्स के पेइंग वार्ड की शुरुआत की गई थी ताकि मरीजों को निजी अस्पतालों जैसी बेहतर सेवा वहां मिल सके. डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि हर पांच दिनों के बाद लालू प्रसाद की ओर से बतौर एडवांस के रूप में पांच हजार रुपये रिम्स प्रबंधन को जमा करना होता है. भर्ती होने के बाद से हर पांचवें दिन लालू प्रसाद यादव की देखरेख कर रहे उनके पार्टी के कार्यकर्ता ही रिम्स प्रबंधन को पांच हजार रुपये जमा करते हैं. जुलाई तक पैसा जमा किया गया है.
डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि लालू यादव को पेइंग वार्ड में कोरोना संक्रमण का खतरा था. लालू यादव के पेइंग वार्ड को कोविड वार्ड में तब्दील कर दिया गया था, और उन्हें कोरोना से बचाने के लिए डायरेक्टर के केली बंगला में रखा गया है. केली बंगला का किराया कितना होगा, फिलहाल तय नहीं किया गया है.
रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद यादव एकमात्र ऐसे मरीज हैं जो लगभग 2 साल तक रिम्स के पेइंग वार्ड में रहे. लालू लगभग 690 दिन रिम्स के सुपर स्पेशियलिटी पेइंग वार्ड में रहे. इस दौरान प्रतिदिन 1000 के हिसाब से करीब 7 लाख का किराया हुआ है. चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू यादव को होटवार सेंट्रल जेल से 6 सितंबर 2018 को इलाज के लिए रिम्स में शिफ्ट किया गया था और तब से वह रिम्स में ही इलाज करा रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद को सबसे पहले रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था.
आवारा कुत्तों से परेशान थे लालू यादव
रांची के खेलगांव स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल से लालू यादव को रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था. वहां आसपास कुत्ते रात भर शोर मचाते थे. कुत्तों के शोर से लालू इतने परेशान हो गए कि वे ठीक से रात में सो नहीं पाते थे. इसकी कई बार शिकायत उन्होंने रिम्स प्रबंधन को दी थी. इसके बाद लालू यादव की परेशानी को देखते हुए उन्हें रिम्स के ही सुपर स्पेशलिटी पेइंग वार्ड में शिफ्ट किया गया. किडनी, हार्ट जैसी कई बीमारियों से ग्रसित लालू 6 सितंबर 2018 से रिम्स में अपना इलाज करा रहे हैं.
कोरोना अच्छा साबित हुआ
दरअसल, लालू यादव की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों और सेवादारों की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव निकली तो लालू यादव पर भी जानलेवा बीमारी का खतरा मंडराने लगा. रिम्स प्रबंधन ने लालू यादव का कोरोना टेस्ट भी किया. हालांकि वह निगेटिव पाए गए. रांची में कोरोना वायरस का संक्रमण जब बढ़ने लगा तो रिम्स प्रबंधन की ओर से पेइंग वार्ड को भी कोविड वार्ड बना दिया. ऐसे में लालू यादव को वहां से हटाना ही था. उन्हें वहां से रिम्स निर्देशक के खाली पड़े केली बंगले में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया.
निगरानी के लिए तीन मजिस्ट्रेट नियुक्त
केली बंगले में आने के बाद लालू यादव पर जेल मैनुअल के उल्लंघन करने का मामला सामने आया. जेल आईजी बिरेंद्र भूषण ने रांची डीसी छवि रंजन को पत्र लिखकर लालू यादव पर जेल मैनुअल के उल्लंघन के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के द्वारा भी जेल मैनुअल के उल्लंघन का आरोप लगाया था. साथ ही उनकी निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का निर्देश दिया था.
इसके बाद से उपायुक्त छवि रंजन ने लालू प्रसाद पर निगरानी के लिए तीन मैजिस्ट्रेट नियुक्त किए. साथ ही साथ उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी. केली बंगला बिहार चुनाव का आरजेडी मुख्यालय बन गया था. हर दिन सैकड़ों की संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता बिहार से आकर बेरोक-टोक लालू से मिलते थे. वे सभी ना सिर्फ जेल मैनुअल का उल्लंघन करते थे बल्कि आपदा प्रबंधन के दिशा निर्देश का भी खुल्लम खुल्ला उल्लंघन होता था.
लालू यादव को चाईबासा कोषागार से तकरीबन 37 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में 24 जनवरी 2018 को 5 साल की सजा सुनाई गयी थी. लालू यादव ढाई साल से ज्यादा जेल की सजा काट चुके हैं, इसी को आधार बनाने हुए उनके वकील ने हाई कोर्ट में बेल की अर्जी भी लगाई है. 11 सितंबर को हाई कोर्ट में इस पर सुनवाई भी होनी है.