छत्तीसगढ़ के जंगल से निकलकर झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) में आया Tiger (बाघ) का बीते 15 दिनों से कुछ पता नहीं चल सकता है. 23 और 24 मार्च को टाइगर ने तीन ग्रामीणों पर हमला किया था. 23 मार्च को टाइगर ने एक पुरुष ग्रामीण पर हमला कर उसे जख्मी कर दिया था, जबकि 24 मार्च को एक पुरुष और एक महिला पर हमला बोला था. तीनों ही ग्रामीण जंगल में महुआ चुनने के लिए गए हुए थे. इसके बाद से ही टाइगर का कुछ अता-पता नहीं चल पा रहा है.
पीटीआर के अधिकारी और कर्मी लगातार टाइगर की खोजबीन में जुटे हुए हैं. मगर, 15 दिन बीत जाने के बाद भी बाघ की जानकारी नहीं लग सकी है. पलामू टाइगर रिजर्व में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी बाघ रिकॉर्ड नहीं हुआ है. पीटीआर के अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि जंगल में न तो बाघ का मल मिला है और न ही उसके पगमार्क ( Foot Print) मिले हैं.
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अंतिम बार कुमांडीह पहाड़ देखा गया था बाघ
पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने बताया कि कुमांडीह पहाड़ पर अंतिम बार बाघ को चढ़ते हुए देखा गया था. उसके बाद वह किस दिशा में गया, इसकी कोई जानकारी अब तक सामने नहीं आई है. पीटीआर में दो डिवीजन हैं और दोनों इलाकों में उनकी पूरी टीम पड़ताल कर रही है.
फील्ड डायरेक्टर ने यह भी बताया कि 24 मार्च से अब तक इन इलाकों में टाइगर के द्वारा किसी जानवर का शिकार करने के भी प्रमाण नहीं मिले हैं. ऐसे में उसकी मौजूदगी पीटीआर में होना संभव नहीं लग रही है.
17 मार्च को PTR में किया था बाघ ने प्रवेश
बताते चलें कि 17 मार्च को मेल टाइगर पीटीआर के कुटकू इलाके के सगाली जंगल में देखा गया था. उसने 3 दिनों के भीतर से तीन पालतू जानवरों का शिकार किया था. ट्रैपिंग कैमरे में भी उसकी तस्वीर कैद हुई थी. साथ-साथ पीटीआर के अधिकारियों ने भी खुद के मोबाइल फोन से उसकी तस्वीर ली थीं.