मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में चल रहा जल सत्याग्रह मंगलवार को 25वें दिन भी जारी रहा. 23 सत्याग्रहियों की हालत काफी बिगड़ गई है, अब वे चल नहीं पा रहे हैं.
डूब प्रभावित घोगल गांव में 25 दिन से जल सत्याग्रह जारी है. सत्याग्रहियों की मांग है कि जलस्तर को कम किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा व पुनर्वास नीति के अनुसार जमीन दी जाए. नर्मदा बचाओ आंदोलन की चितरूपा पालित ने बताया कि 23 सत्याग्रहियों की हालत बिगड़ गई है, उनके पैर चलने लायक नहीं रह गए हैं. नित्यकर्म के किए उन्हें गोद में उठाकर ले जाना पड़ रहा है. पैरों से खून रिसने के कारण मछलियों का काटना भी बढ़ गया है.
देश के कई बुद्धिजीवियों- मैग्सेसे पुरस्कार विजेता अरुणा राय, पूर्व वित्त सचिव ईएएस शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले, छत्तीसगढ़ पीयूसीएल की सचिव सुधा भारद्वाज, प्रोफेसर कमल मित्र चिनाय सहित 50 से अधिक बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर घोगल गांव में चल रहे जल सत्याग्रह से अवगत कराया है और इस आंदोलन के प्रति मुख्यमंत्री की उदासीनता का जिक्र भी किया है.
उन्होंने मांग की है कि बांध के पानी का स्तर 191 मीटर से कम कर के 189 मीटर किया जाए और डूब में आने से पहले लोगों का पुनर्वास किया जाए. बुद्धिजीवियों ने अपने पत्र में कहा है कि ओंकारेश्वर डूब प्रभावितों को कम से कम पांच एकड़ जमीन दी जाए, अगर सरकार के पास जमीन न हो तो उतनी ही जमीन खरीदने के लिए बाजार भाव से अनुदान दिया जाए. विस्थापितों को भूखंड एवं कृषि भूमि एक साथ दी जाए, ताकि उन्हें रोजी-रोटी के लिए संघर्ष न करना पड़े.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) मप्र राज्य समिति के सचिव बादल सरोज ने कहा है कि जल सत्याग्रह के 25 दिन हो गए हैं. केंद्र या प्रदेश सरकार ने मुआवजे और पुनर्वास सहित आंदोलनकारियों की मांगों पर पर बात तक करने की मंशा नहीं जताई है. उल्टे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जो बयान आए हैं, वे पीड़ित नागरिकों का अपमान करने वाले हैं.
इनपुट: IANS