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Fake Fishing Farming: मछली पालन की फर्जी स्कीम बताकर किसानों से ठग लिए 100 करोड़

भोपाल क्राइम ब्रांच ने किसानों से मछली पालन की फर्जी स्कीम बताकर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है. आरोपियों ने प्रदेश सहित कई राज्यों के सैकड़ों किसानों को कोरड़ों रुपए का चुना लगाया है. पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. बाकी फरार आरोपियों की तलाश कर रही है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भोपाल क्राइम ब्रांच ने ठग पिता-बेटे को किया अरेस्ट
  • गुड़गांव में चला रहे थे फिश फॉर्च्यून प्रोडक्शन कम्पनी
  • 15 महीने तक हर महीने 37500 देने का किया था वादा

भोपाल क्राइम ब्रांच ने किसानों के साथ मछली पालन के नाम पर करीब 100 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है. उसने इस गिरोह के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया है. क्राइम ब्रांच लंबे समय से इस गिरोह के मुखिया की तलाश कर रही थी. आरोपित तालाब बनाकर उसमें मछली पालन करने की 5-5 लाख और 11-11 लाख रुपये की फर्जी स्कीम बताकर किसानों को पैसे कमाने का लालच देकर पैसे ऐंठकर फरार हो जाते थे.

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ऐसे सामने आया मामला

किसान कपिल दुबे ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दी थी कि गुड़गांव की फिश फॉर्च्यून प्रोडक्शन कम्पनी के संचालक बृजेन्द्र कश्यप और उसके सहायक संचालक/प्रमोटर धर्मेन्द्र ठाकुर, प्रह्लाद शर्मा और मनोज कटारे ने कई किसानों के साथ करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की है. शिकायत की जांच करने पर क्राइम ब्रांच को मालूम हुआ कि यह धोखाधड़ी करीब 100 करोड़ रुपए की है जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने आईपीसी की धारा 420, 409, 120 बी 34 के तहत केस दर्ज किया था.

भोपाल से पकड़ा मुख्यआरोपित

क्राइम ब्रांच द्वारा इस मामले के आरोपी बृजेंद्र कश्यप और विनय शर्मा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था. इस मामले में फरार चल रहे आरोपी प्रहलाद शर्मा को अब क्राइम ब्रांच की टीम ने भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र से पकड़ा पाई. इसके बाद प्रहलाद की निशानदेही पर उसके बेटे शुभम को भी गिरफ्तार किया गया है.

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इसलिए फंसते चले गए किसान 

आरोपी किसानों को स्कीम बताते थे कि आपकी जमीन पर कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर मछली पालन किया जाएगा. इसके एवज में किसानों को कम्पनी तीस किश्तों में यानी 15 महीने तक 37,500 हर महीने देगी. सिक्युरिटी मनी मिलने के तीन दिन में मछली पालन का काम शुरू कर देगी. अगर मछली पालन के दौरान मेडिकल संबंधी आवश्यकता पड़ी तो उसे कंपनी उसे उपलब्ध कराएगी. साथ ही हर महीने पानी की सप्लाई, सिक्यूरिटी गार्ड और इलेक्ट्रिसिटी उसके लिये भी हर महीने 8,000 रुपये देगी. किसान का कंपनी के मछली पालन के काम में  कोई हस्तक्षेप नही रहेगा.

पैसे मिलते ही फोन उठाना किया बंद

ठगों की बातों में आने के बाद किसानों ने अपने तालाबों में काम शुरू करवाया. इस दौरान कुछ किसानों के पास एग्रीमेंट के अनुसार कुछ किस्तें आयीं जबकि कुछ के पास बिल्कुल भी नहीं आईं. जब किसानों धर्मेन्द्र ठाकुर, प्रह्लाद शर्मा और  मनोज कटारे से इस संबंध में बात करना चाही तो शुरुआत में तो किस्त के पैसे देने के संबंध में टालामटोली की गई फिर उन्होंने फोन ही उठाना बंद कर दिया.

 

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