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भोपाल: कल्याण संगठनों का दावा, शहर में कोरोना से हुई मौतों में 56% गैस पीड़ित

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस के रिसाव की मार 36 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को सहनी पड़ रही है. भोपाल में गैस पीड़ितों के कल्याण के लिए काम करने वाले छह संगठनों का दावा है कि शहर में आम लोगों के मुकाबले गैस पीड़ितों की कोरोना वायरस से ज्यादा मौत हुई है.

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शहर में कोरोना से हुई मौतों में 56% गैस पीड़ित
शहर में कोरोना से हुई मौतों में 56% गैस पीड़ित
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भोपाल में गैस पीड़ितों के कल्याण के लिए काम कर रहे 6 संगठन
  • केंद्र सरकार से दखल देने की मांग
  • 254 गैस पीड़ितों की अब तक कोरोना से मौत

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस के रिसाव की मार 36 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को सहनी पड़ रही है. भोपाल में गैस पीड़ितों के कल्याण के लिए काम करने वाले छह संगठनों का दावा है कि शहर में आम लोगों के मुकाबले गैस पीड़ितों की कोरोना वायरस से ज्यादा मौत हुई है. इन संगठनों ने डाउ केमिकल्स से ऐसे गैस पीड़ितों के परिवारों के लिए अतिरिक्त मुआवजे देने की मांग की है. साथ ही केंद्र सरकार से इसमें दखल देने की अपील की है. डाउ कैमिकल्स वो कंपनी है जिसने यूनियन कार्बाइड को बाद में खरीद लिया था. 

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भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन’ की रचना ढींगरा ने बताया कि “भोपाल में 450 लोग अब तक कोरोना से अपना जीवन खो चुके हैं, इनमें से 254 गैस पीड़ित थे. गैस पीड़ितों की आबादी शहर की आबादी का 17 प्रतिशत है, जबकि कोरोना से शहर में हुई कुल मौतों में उनकी हिस्सेदारी 56 प्रतिशत है.

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ढींगरा ने कहा कि यूनियन कार्बाइड के खुद के दस्तावेज यह बताते हैं कि रिसाव वाली गैस मिथाइल आइसो सायनेट (MIC) का पीड़ितों पर स्थाई तौर पर असर हुआ, लेकिन इसके बावजूद 90% पीड़ितों को सिर्फ 25,000 रुपए मुआवजा दिया गया था. इसके पीछे दलील ये दी गई थी कि इन पीड़ितों को सिर्फ अस्थाई रूप से क्षति का सामना करना पड़ा था. केंद्र सरकार को अब पीड़ितों के सटीक आंकड़े क्यूरेटिव पेटीशन में पेश करने चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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साढ़े तीन दशकों से भी अधिक समय से गैस पीड़ितों के बीच काम करने वाली रशीदा बी ने दावा किया कि जिन गैस पीड़ितों की अब कोरोना से मौत हुई है, उनके दस्तावेजों से उनकी पहचान की गई है. 3 दिसंबर 1984 को भोपाल में अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से जहरीली गैस लीक हो गई थी, जिससे हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोगों को स्थाई रूप से शारीरिक क्षति हुई थी.

यूनियन कार्बाइड को बाद में डाउ केमिकल्स ने अधिगृहीत कर लिया. गैस पीड़ितों का आरोप है कि यह कंपनी अपनी कानूनी और पर्यावरणीय देनदारियों से भाग रही है. 

बता दें कि गैस त्रासदी से कितने लोगों की जान गई, इन आंकड़ों को लेकर विवाद रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गैस लीक 25,000 लोगों की मौत की वजह बनी. जबकि गैस पीड़ित संगठनों का दावा है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज्यादा थी. 


 

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