राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रभक्ति और नैतिकता की नुमाइंदगी का दावा करता है. लेकिन जिस मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, वहीं पर आरएसएस के नेता ही अरबों के एक बड़े घोटाले में घिरते दिख रहे हैं.
घोटाले में एक पूर्व सरसंघचालक का नाम आ रहा है, तो संघ के एक बड़े नेता पर भी आरोप लग रहे हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पहले ही कांग्रेस बहुत आरोप लगा चुकी है. जानिए संघ के दो बड़े चेहरों के नाम कैसे भोपाल के व्यापम घोटाले में आ गए.
दरअसल, घोटाले की एक चिंगारी भर उठी थी, लेकिन देखते ही देखते वह ऐसी सुलगी कि उसकी लपटें भोपाल की सड़कों पर दिखाई देने लगीं. कांग्रेसी विरोध के लिए भोपाल की सड़कों पर उतर आई है. व्यापारिक परीक्षा मंडल, यानी 'व्यापम' घोटाले की आंच बीजेपी के नेताओं से आगे बढ़कर आरएसएस के दामन को झुलसाने लगी है.
सवाल है कि क्या व्यापम घोटाले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस भी शामिल है? जिस घोटाले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, उसमें सबसे सनसनीखेज खुलासा किया है व्यापम के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी ने. त्रिवेदी के मुताबिक करीब दो हजार करोड़ रुपये के घोटाले में पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन और संघ के पदाधिकारी सुरेश सोनी भी शामिल थे.
त्रिवेदी ने संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी के बारे में खुलासे किए. इस घोटाले में फंसे पंकज त्रिवेदी ने जांच करने वाले एसटीएफ को बताया कि पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने फूड इंस्पेक्टर पद के लिए उम्मीदवार मिहिर कुमार की सिफारिश की थी, जिनका रोल नंबर 702735 था. उन्होंने बताया था कि मिहिर आरएसएस नेता सुरेश सोनी के आदमी हैं. उन्होंने राजकुमार धाकड़ (रोल नंबर 703897), नरेश चंद सागर (रोल नंबर 707032). सुनील कुमार साहू (रोल नंबर 711230) और अवधेश भार्गव (रोल नंबर 705133) की भी सिफारिश की थी. वर्मा के ओएसडी ने कहा था कि पांचों उम्मीदवार काफी महत्वपूर्ण हैं.
जिस मिहिर की यहां चर्चा हो रही है, वे संघ के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन का सेवादार रहा है. सुदर्शन अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनका 15 सितंबर, 2012 को ही निधन हो चुका है.
मिहिर ने संघ के पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन का कच्चा चिट्ठा खोला है. एसटीएफ को मिहिर कुमार ने जो बताया, वह इस तरह है:
'मैं केएस सुदर्शन के सहायक के रूप में काम करता था. मैंने 2012 के फूड इंस्पेक्टर एग्जामिनेशन के अपने आवेदन फॉर्म की फोटो कॉपी सुदर्शन को दी. मैंने उनसे अपनी नौकरी के लिए गुजारिश की. उन्होंने इसके लिए तुरंत पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को फोन किया. इस पर शर्मा ने नौकरी के लिए भरोसा दिया. सुदर्शन ने मुझसे कहा कि मैं एग्जाम में जितना जानता हूं, उतने सवालों के जवाब दूं और बाकी ओएमआर शीट खाली छोड़ दूं. मैंने हिंदी, गणित. इंग्लिश, रिजनिंग, भौतिकी और सामान्य ज्ञान के करीब 50 फीसदी सवालों के जवाब दिए, बाकी खाली छोड़ दिया. लेकिन 18 अक्टूबर 2012 को जब इम्तिहान के नतीजे आए, तो मेरिट लिस्ट में मेरा नाम सातवें नंबर पर था. इस एग्जाम को व्यापम ने 7 अक्टूबर 2012 को करवाया था.'
मध्य प्रदेश की सेवा के लिए कई बड़ी भर्तियां व्यापम के जरिए ही होती है. मध्य प्रदेश में दस साल से बीजेपी का राज है और संघ का दबदबा है. एसटीएफ के सामने मिहिर का खुलासा नौकरियों में संघ के असर को दिखाता है.
उंगली सीधे संघ पर उठी है, इसलिए बीजेपी जवाब देने के लिए आक्रामक मुद्रा में आ गई.
बीजेपी नेता प्रभात झा ने कहा, 'संघ के नेता कभी ऐसा नहीं कर सकते...एक नेता इस दुनिया में नहीं है, दूसरे अहम हैं.'
लेकिन दिल्ली से भोपाल तक राजनीति के हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस को एक मौका मिल गया बीजेपी को आईना दिखाने का, खुद को संवारने का.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती तक पर इस घोटाले में आरोप लगे. लेकिन इस बार बीजेपी का मार्गदर्शन करने वाले संघ तक सवालों के घेरे में आया है. यह बताता है कि मामला कितना संगीन है.