मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी से इन्सान तो इन्सान, अन्य जीव भी त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. पानी की कमी अब जानलेवा होने लगी है. शनिवार को प्रदेश के देवास जिले में भीषण गर्मी के कारण 15 बंदरों की मौत का मामला प्रकाश में आया है. घटना बागली के जोशी बाबा वन्य रेंज की है. हालांकि वन अधिकारियों के अनुसार बंदरों की मौत के पीछे किसी इन्फेक्शन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
जानकारी के अनुसार शव सड़ने भी लगे थे. वन अधिकारियों ने कई शवों को जलवा भी दिया. इस संबंध में जिला वन अधिकारी पीएन मिश्र ने कहा कि शव सड़ रहे थे. हम एहतियातन सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं. कुछ शव जला दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि पास के ही एक जल स्रोत पर बंदरों के दूसरे समूह का कब्जा था. जिसकी वजह से बंदरों का यह समूह पानी प्राप्त नहीं कर सका. नतीजतन इनकी मौत हो गई.
मिश्र ने कहा कि मृत बंदरों की विसरा जांच के लिए सैंपल लैब भेजा गया है, जिससे इनकी मौत के असली कारण का पता लग सके. उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में गर्मी ने इस वर्ष दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. राजधानी भोपाल में 40 साल का रिकार्ड तोड़ते हुए पारा 45.9 डिग्री तक पहुंच गया था, जो सामान्य से 7 डिग्री अधिक है. गर्मी के सितम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार को गर्मी और लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी.
सरकार ने एडवाइजरी जारी कर घर के अंदर हवादार, ठंडे स्थान पर रहने, अति आवश्यक ना हो तो बाहरी गतिविधियां सुबह व शाम के समय ही करने, शारीरिक श्रम से जुड़ी गतिविधियों को दिन के अधिकतम तापमान वाले घंटों में नहीं करने, सफेद व हल्के रंग के पतले वस्त्रों का उपयोग करने, सर को टाइट कपड़े या टोपी से ढकने के साथ ही काले चश्मे का उपयोग करने की सलाह दी.
अधिक से अधिक पेय पदार्थों जैसे नींबू पानी, लस्सी, छाछ, जलजीरा, आम का पन्ना, दही, नारियल पानी आदि के सेवन की भी सलाह दी गई. लेकिन अफसोस की इन बेजुबान जीवों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई. यदि इनके लिए भी एडवाइजरी जारी की गई होती तो शायद इन बेजुबानों की जान नहीं गई होती.