मूकबधिर गीता को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से पाकिस्तान से वापस भारत लाया गया था. तभी से गीता के परिजनों की तलाश जारी है. अब गीता को उसका परिवार मिलने की उम्मीद एकबार फिर बंध गई है. महाराष्ट्र के परभणी निवासी एक परिवार ने गीता के परिजन होने का दावा किया है. परभणी निवासी परिवार के दावे के बाद जिस आनंद सोसाइटी में गीता रहती हैं, उस सोसाइटी के प्रमुख ज्ञानेंद्र पुरोहित चार सदस्यीय टीम के साथ परभणी पहुंचे. इस टीम में एक महिला भी है.
चार सदस्यीय इस टीम के साथ गीता भी परभणी गई हैं. बताया जा रहा है कि गीता अब इंदौर की बजाय महाराष्ट्र के परभणी में रहेंगी. परभणी के परिवार ने गीता को लेकर जो दावे किए हैं, वे सच्चाई के काफी करीब हैं. इसे देखते हुए ही गीता को लेकर आनंद सोसाइटी की टीम परभणी रवाना हुई है. जानकारी के मुताबिक परभणी के निवासी एक वाघमारे परिवार ने गीता को अपने परिवार की बेटी बताया है.
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वाघमारे परिवार ने गीता को लेकर जो दावे किए हैं, वे गीता की ओर से साइन लैंगुएज में बताए गए तथ्यों से काफी मिलते-जुलते हैं. लिहाजा, प्रशासन और एनजीओ के जरिए गीता को महाराष्ट्र के परभणी भेजा गया है. परभणी में गीता का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा. डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आने तक गीता को पहल फाउंडेशन की देखरेख में रखा जाएगा.
पुनर्वास कार्यक्रम के तहत मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस और समाज कार्य विभाग की तकनीकी मदद भी ली जाएगी. गीता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी पहल फाउंडेशन की ओर से प्रयास किए जाएंगे.
गौरतलब है कि आनंद सोसाइटी के ज्ञानेंद्र पुरोहित ने कई दफे ये संभावना जताई थी कि गीता महाराष्ट्र, तेलंगाना या छत्तीसगढ़ की निवासी हो सकती है. गीता को अक्टूबर 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों से पाकिस्तान से वापस भारत लाया जा सका था. गीता को जुलाई 2020 में विजय नगर स्थित आनंद सोसाइटी में शिफ्ट किया गया था.
22 जुलाई को ही मिल गए थे ये क्लू
गीता को पिछले साल यानी 2020 में 20 जुलाई को आनंद सर्विस सोसायटी में शिफ्ट किया गया था. सोसाइटी के प्रमुख ज्ञानेंद्र पुरोहित ने 2 दिन बाद ही यानी 22 जुलाई को गीता की दाहिनी नाक छिदी होने के चलते अंदाजा लगा लिया था कि गीता का जुड़ाव महाराष्ट्र या तेलंगाना से हो सकता है. वहीं, गीता जिस तरीके से चावल खाती थीं उसमें दक्षिण भारत का तरीका दिखता था. लिहाजा, उसी दिशा में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था.
ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि गीता अक्सर डीजल वाले इंजन और गन्ने के खेतों की बात करती थी. जानकारी जुटाई तो पता चला कि मराठवाड़ा क्षेत्र में आज भी डीजल इंजन जुड़ते हैं. गीता के संभावित परिवार की ओर से जो तथ्य बताए गए हैं, वो सच्चाई के काफी करीब हैं. फिलहाल गीता पहल संस्था की देखरेख में हैं और डीएनए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
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