scorecardresearch
 

उज्जैन में जनसुनवाई के दौरान पति-पत्नी ने की आत्महत्या की कोशिश

उज्जैन में अपर कलेक्टर के यहां जनसुनवाई में पति-पत्नी दोनों ही जहर की बोतल लेकर पंहुच गए और आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया.

Advertisement
X
उज्जैन में जनसुनवाई के दौरान आत्महत्या की कोशिश
उज्जैन में जनसुनवाई के दौरान आत्महत्या की कोशिश

Advertisement

उज्जैन में अपर कलेक्टर के यहां जनसुनवाई में आए दंपत्ति ने उस दौरान ही खुदकुशी करने की कोशिश की. इस घटना के बाद हडकंप मच गया. आनन-फानन में कर्मचारियों ने महिला के हाथों से जहर की शीशी छिनी और अधिकारियों से मिलवाया.

दरअसल सारंगपुर निवासी विनोद और टीना को 15 जून को उज्जैन के चरक अस्पताल में एक बच्चा हुआ था. पैदा होने के दौरान बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था. इसके बाद 23 जून को मां-बेटे को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी, लेकिन अगले ही दिन बच्चे को परेशानी होने लगी. 25 जून को दंपत्ति अपने बेटे को दिखाने चरक अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर ने ये कह कर बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया कि बच्चा स्वस्थ है.

 

डॉक्टर को बताया बच्चे की मौत का जिम्मेदार
उसके बाद विनोद ने सीएम हेल्पलाइन की मदद से बच्चे को आईसीयू में भर्ती कराया. बच्चे को भर्ती करने के बाद डॉक्टर ने दंपत्ति को बच्चे का डायपर लाने को कहा, लेकिन वापस आने पर बताया कि बच्चे की मौत हो गई. बच्चे के पिता विनोद और मां टीना ने डॉक्टर राहुल गुप्ता को बच्चे की मौत का जिम्मेदार बताया था, लेकिन डॉक्टर ने तर्क दिया कि टीना ने अपने बच्चे को गलत तरीके से दूध पिलाया था, जिसके कारण बच्चे की मौत हुई.

Advertisement

मामले में जारी है जांच
बच्चे की मौत के बाद पति-पत्नी ने पोस्टमॉर्टम के लिए भी कहा, लेकिन अस्पताल ने बिना पोस्टमॉर्टम के ही बच्चे की लाश को परिजनों को सौंप दिया. इस बात की शिकायत उज्जैन कलेक्टर से परिजनों ने की, जिसके बाद जांच चल रही है. कई बार जनसुनवाई के चक्कर काटने और अधिकारियों से मिलने के बाद भी जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो मंगलवार को पति-पत्नी दोनों ही जनसुनवाई में जहर की बोतल लेकर पंहुच गए और आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया.

Advertisement
Advertisement