मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने बुधवार को ट्वीट कर बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत देश के सबसे साफ शहर इंदौर को अब भारत का पहला 'वॉटर प्लस' शहर घोषित किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता के प्रति अपने दृढ़ संकल्प और समर्पण के लिए इंदौर पूरे देश के लिए एक मिसाल रहा है.
क्या है वॉटर प्लस सर्वे?
स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए अब वॉटर प्लस (Water Plus) सर्वे भी हो रहा है. इसके लिए जुलाई में केंद्र की एक टीम इंदौर आई थी. केंद्र की टीम ने 11 पैरामीटर्स पर सर्वे शुरू किया था. तीन-चार दिन तक चले इस सर्वे के दौरान करीब 200 से ज्यादा जगहों का मुआयना किया था. वॉटर प्लस (Water +) के 700 नंबर हैं.
स्वच्छ सर्वेक्षण में अलग-अलग पैरामीटर्स के अलग-अलग नंबर पर हैं और इन्हीं नंबरों के आधार पर तय होता है कि कौन सा शहर सफाई के मामले में किस नंबर पर है. इंदौर पिछले 4 साल से सफाई में नंबर-1 रहा है. और इस बार वॉटर प्लस में भी नंबर-1 आने के बाद सफाई में भी लगातार 5वीं बार नंबर-1 आना लगभग तय हो गया है.
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इंदौर ने कैसे हासिल किया ये मुकाम?
इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया, वॉटर प्लस प्रोटोकॉल की गाइडलाइंस के अनुसार, इंदौर नगर निगम (IMC) ने 25 छोटे-बड़े नालों में 1,746 पब्लिक और 5,624 घरेलू सीवर आउटफॉल की टैपिंग कर नदी-नालों को सीवर से मुक्त किया था. नगर निगम ने काल्ह और सरस्वती नदी को भी सीवर लाइन से फ्री किया था.
वहीं, इंदौर की सिविक कमिश्नर प्रतिभा पाल ने बताया कि शहर में 7 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं, जिनमें से रोजाना 110 मिलियन लीटर ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने बताया, गाइडलाइंस के हिसाब से शहर में 147 स्पेशल टाइप के यूरिनल का निर्माण किया गया. साथ ही तालाब, कुओं और सभी वॉटर बॉडीज को साफ करने का काम भी हो रहा है.