scorecardresearch
 

मध्य प्रदेशः तबाह किसानों के जख्म पर बीमे का नमक, 7 से 10 रुपये मिली राहत राशि

सीएम ने दावा किया था कि सभी किसानों को खराब हुई फसल का उचित बीमा क्लेम दिया जा रहा है. तब से ही अन्नदाता किसानों को एक उम्मीद जगी थी कि बीमे के रूप में मिलने वाली राशि से राहत मिलेगी.

Advertisement
X
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीमा राशि की सूची देख भड़के किसान
  • बताया सरकार की ओर से हुआ छलावा
  • सैकड़ों किसानों की बीमा राशि सौ से कम

अन्नदाता किसान की सूरत बदलने का दावा हर सरकार करती है. केंद्र सरकार की ओर से किसानों की आय दोगुनी किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं. प्राकृतिक आपदा की मार से किसान को बचाने के लिए बीमा योजना शुरू कर इसे सबसे अच्छी योजनाओं में से एक बताया जाता रहा, लेकिन यह योजना कुदरत की मार से उत्पन्न हुए किसानों के जख्म पर नमक की तरह साबित हो रही है.

Advertisement

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के करीब 22 लाख किसानों के बीच 4688 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि के वितरण की शुरुआत 18 सितंबर को की थी. इस पर सवाल भी उठने लगे हैं. सवाल उठाने वाले भी कोई और नहीं, प्रदेश के अन्नदाता ही हैं. अन्नदाताओं का सवाल उठाना तब लाजमी हो जाता है, जब उनकी हजारों रुपये की बर्बाद हुई फसल के एवज में बीमे की राशि सात से 10 रुपये जैसी मामूली राशि हो.

सीएम ने दावा किया था कि सभी किसानों को खराब हुई फसल का उचित बीमा क्लेम दिया जा रहा है. तब से ही किसानों को एक उम्मीद थी कि बीमे के रूप में मिलने वाली राशि से राहत मिलेगी. लेकिन आगर मालवा जिले के कुछ गांवों के किसानों के हाथ यह सूची लगी तो वे खुश होने की बजाय और निराश हो गए.

Advertisement

आगर मालवा जिले के पंचारुंडी पटवारी हल्के के किसानों ने जब बीमा क्लेम की राशि की सूची देखी तो उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं. गांव में कई किसानों को सात से 10 रुपये तक की बीमा राशि मिली है. सैकड़ों की संख्या में किसानों को मिली बीमा राशि 100 रुपये से भी कम है. इस गांव में कृषकों को सात से 10 रुपये तक की बीमा राशि मिली है.

ग्राम तोलाखेड़ी के किसान भगवान सिंह ने बैंक से कर्ज लेकर फसल बोई थी. तब उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी और बैंक का कर्ज भी पट जाएगा. लेकिन प्रकृति की मार से फसल बिगड़ गई और लागत मूल्य भी नहीं निकल पाए. ऐसे में एक मात्र उम्मीद सरकारी बीमा राहत राशि ही थी. भगवान सिंह कोई इकलौते किसान नहीं, उनके जैसे कई किसान हैं, जिनके खाते में सौ रुपये से भी कम की बीमा राशि आई है.

ओंकारलाल, अंतर सिंह, गोपाल यादव जैसे कई किसानों का भी यही दर्द है. किसान इसे जख्मों पर नमक छिड़कना बता रहे हैं. किसानों का आरोप है कि साल 2018 में फसलों को भारी नुकसान हुआ था. आगर मालवा जिले के आगर तहसील क्षेत्र के कई गांवों की यही कहानी है.

कांग्रेस ने साधा निशाना

Advertisement

किसानों की बीमा राशि को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है. आगर मालवा जिले में कांग्रेस के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन में पहुंचे पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा.

पूर्व मंत्री पटवारी और जयवर्धन सिंह के बयानों में किसान बीमा का मुद्दा ही छाया रहा. पटवारी ने कहा कि किसानों से 900 रुपये प्रीमियम लिया जा रहा है और क्लेम की राशि 11 रुपये दी जा रही है. पटवारी ने इसे किसानों के साथ मजाक बताया.

 

Advertisement
Advertisement