मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में चल रहा जल सत्याग्रह 32वें दिन बाद स्थगित कर दिया गया है. हालांकि सत्याग्रहियों ने कुछ दिनों में जोरदार संघर्ष की चेतावनी भी दी है. किसान-मजदूरों ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया है.
नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 189 मीटर से 191 मीटर किए जाने से खेती की जमीन डूब गई है और कई परिवार रोजी-रोटी के संकट से घिर गए हैं. प्रभावित किसानों ने 11 अप्रैल को घोगलगांव में जल सत्याग्रह शुरू किया था, जिसे नर्मदा बचाओ आंदोलन और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिला.
32 दिनों से पानी में सत्याग्रह करने वालों की हालत बिगड़ रही थी. उनके पैर पहले ही गल चुके थे. उधर सरकार ने साफ कर दिया था कि वह जलस्तर कम नहीं करेगी. सरकार ने वादा किया कि पुर्नवास नीति का पालन करते हुए वह कहीं और जमीन मुहैया करा देगी. प्रभावितों को जमीन दिखाई भी गई, मगर उन्हें पसंद नहीं आई.
जल सत्याग्रह के 32वें दिन घोगलगांव पहुंचे आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने नर्मदा घाटी के किसानों के साथ सत्याग्रह को स्थगित करने का आग्रह किया. सबने सत्याग्रहियों को आश्वासन दिया कि सब लोग मिलकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे.
नर्मदा बचाओ आंदोलन की चितरूपा पालित ने बताया कि प्रशासन को विस्थापितों का पुनर्वास करने के लिए दो महीने का समय दिया गया है. उन्होंने बताया कि सरकार की किसान के प्रति असंवेदनशीलता को देखते हुए, राज्य सरकार के खिलाफ प्रदेशभर में किसान-मजदूर संघर्ष शुरू करने का संकल्प लिया गया.
सत्याग्रह स्थगित होने के बाद सारे सत्याग्रहियों को एम्बुलेंस में खंडवा अस्पताल ले जाया गया.
IANS से इनपुट